Aniruddh Singh
20 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी कमजोरी की ओर बढ़ता दिख रहा है। बुधवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह 9.15 पर सेंसेक्स गिरावट के साथ 81,794.65 पर खुला और 11.24 बजे तक करीब 614.34 अंक की गिरावट के साथ 81,566.13 के स्तर पर पर पहुंच गया। निफ्टी भी आज सुबर गिरावट में 25,141.00 पर गिरावट में खुला। इसके बाद एनएसई के इस बेंचमाार्क इंडेक्स लगातार दबाव बना रहा और इस समय तक यह 171.25 अंक की गिरावट के साथ 25,061.25 पर आ गया। बाजार की मौजूदा चाल साफ तौर पर बताती है कि इस समय निवेशकों का भरोसा घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी डगमगाया हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में तेज बिकवाली के बावजूद बाजार का संभल न पाना इस बात का संकेत है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

बाजार पर दबाव किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई नकारात्मक कारकों के एक साथ असर से बना हुआ है। बैंकिंग, मिडकैप और अन्य प्रमुख सूचकांकों में गिरावट यह दर्शाती है कि कमजोरी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई है। हालांकि, गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। आज के कारोबार में क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण, थंगामयिल ज्वेलरी, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स, कार्बोरंडम यूनिवर्सल और एल्काइल एमाइंस जैसे शेयर टॉप गेनर रहे। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि चुनिंदा मजबूत कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं। दूसरी ओर, कल्याण ज्वेलर्स, अनूप इंजीनियरिंग, एआईआईएल, यूपीएल और सैमही होटल्स जैसे शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली और ये टॉप लूजर की सूची में शामिल रहे। बाजार की गिरावट की एक बड़ी वजह भारतीय रुपए का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना है। आज रुपया 31 पैसे टूटकर 91.28 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।

रुपए की कमजोरी से आयात महंगा होता है, विदेशी कर्ज का दबाव बढ़ता है और महंगाई की आशंका गहराती है, जिसका सीधा असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ता है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। जनवरी महीने में ज्यादातर सत्रों में एफआईआई शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं, जिससे बाजार में नकदी की कमी महसूस की जा रही है। वहीं, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट, इंडिया VIX में उछाल और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ व वैश्विक व्यापार से जुड़े बयानों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्कता के साथ फैसले लेने की जरूरत है।