Naresh Bhagoria
21 Jan 2026
ब्रजेंद्र वर्मा, भोपाल।कलियासोत नदी व डैम पर भी बीते 20 सालों बेहिसाब अवैध निर्माण हुए और ये अब भी जारी हैं। नदी व डैम के कैचमेंट एरिया में दुकानें, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट बन गए हैं और धड़ल्ले से चल भी रहे हैं। नियम कहता है कि नदी और कैचमेंट के 33 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए। यह हकीकत परखने के लिए पीपुल्स समाचार की टीम ने कलियासोत डैम और नदी एरिया की 2 घंटे तक पड़ताल की।
10 किमी के सफर में पता चला कि झुग्गियों और इमारतों का सीवेज व कचरा कलियासोत नदी व डैम में सीधा जा रहा है। वहीं यहां पर कचरा भी फेंका जा रहा है। डैम के कैचमेंट प्लॉटिंग हो रही है। ऐसा नहीं कि प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी खबर नहीं है, सबको सब पता है पर रसूखदारों के प्रभाव में सभी कार्रवाई करने से मुंह फेर लेते हैं।

कलियासोत डैम से कलियासोत नदी शुरू होती है। ज्यादा बारिश में जब डैम के गेट खोले जाते हैं तो कलियासोत नदी अपनी सीमाएं बता देती हैं। दामखेड़ा ए, बी सेक्टर की झुग्गियों में पानी भर जाता है। सर्वधर्म ब्रिज से सटे बने फ्लैटों की दीवारों तक पानी पहुंच जाता है। सर्वधर्म ब्रिज से लेकर सलैया तक नदी का कैचमेंट भूमाफिया ने चोरी कर लिया है। बड़ी मात्रा में सीवेज नदी में मिल रहा है। कचरा भी भारी मात्रा में नदी में डाला जा रहा है।

बीते दो सालों में कलियासोत नदी के किनारे कोलार विरासा हाइट्स के आसपास नदी किनारे रेस्टारेंट खुल गए हैं। भूमाफिया ने धीरे-धीरे यहां मुरम डलवाकर नदी के किनारे को खत्म कर दिया। इसके बाद टीन शेड लगवाकर रेस्टारेंट खोले लिए। विरासा हाइट्स ब्रिज से शाहपुरा तक जाने वाली सड़क किनारे एक दर्जन से अधिक रेस्टारेंट व दुकानें बनाकर 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपए महीने के किराए से दे दिए गए।

अमरनाथ कॉलोनी से वाल्मी ब्रिज के पास से केरवा डैम व नीलबड़ पहुंच मार्ग से लगे कलियासोत डैम के कैचमेंट में व्यवसायिक गतिविधियां तेजी गति से बढ़ी हैं। कैचमेंट एरिया में रिसोर्ट, रेस्टोरेंट, दुकानें, बंगले बन चुके हैं। कई का निर्माण अब भी चल रहा है। कैचमेंट में डेयरियों का संचालन किया जा रहा है।
कलियासोत नदी को गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है। नगर निगम ने करीब 31 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए हैं। प्रोजेक्ट 2-3 साल में पूरा करना है। हालांकि, नदी और उसके 33 मीटर बफर जोन में कब्जे हटाए बिना काम शुरू होना संभव नहीं है। स्टॉप डैम बनने के बाद 30 लाख घनमीटर पानी जमा होगा और ये निर्माण जलभराव में आ जाएंगे।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने को नदी के 33 मीटर दायरे को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। भोपाल जिला न्यायालय ने भी कार्रवाई रोकने की याचिका खारिज कर दी है। राजस्व विभाग ने 60 से अधिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिए हैं। सीमांकन में झुग्गियां, फार्म हाउस, धर्मस्थल, क्लब हाउस और फ्लैट हैं।
एनजीटी का आदेश : कलियासोत नदी के दोनों ओर 33 मीटर (लगभग 100 फीट) के क्षेत्र को नो-कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया है । सभी अतिक्रमणों (मकान, फ्लैट, धार्मिक स्थल, फार्महाउस आदि) को हटाया जाए।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन, एडीएम, एसडीएम, ननि भवन अनुज्ञा अधिकारी अनूप गोयल, अतिक्रमण प्रभारी, तहसीलदार,नायब तहसीलदार व पटवारी कलियासोत नदी-डैम पर अतिक्रमण व अवैध निर्माण के लिए सीधे जिम्मेदार हैं।
अवैध निर्माणों से कलियासोत डैम को भरने वाले जंगलों से निकलने वाले नाले गायब हो गए हैं। कोई भी नदी व डैम पानी की जमाव से बनती है। पानी नहीं जाएगा, नदी व डैम खत्म हो जाएंगे। एक समय राजाभोज के समय भोपाल पानी के नीचे था। भोजपुर में डैम हुआ करता था। डैम तोड़ा गया। पानी घटा तो मंडीदीप अन्य क्षेत्र अस्तित्व में आए। कलियासोत डैम व नदी के कैचमेंट एरिया में कई मल्लिटयां, कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इससे नदी व डैम को भरने वाले कई नाले विलुप्त हो चुके हैं। यदि कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण नहीं हटाए गए तो नदी व डैम सिर्फ किस्से-कहानियों तक सीमित रह जाएंगे।
यशदीप सिंह ठाकुर, पर्यावरण एडवोकेट व मटेरियल सांइस इंजीनियर
कलियासोत नदी के कैचमेंट में हो रहे अवैध निर्माण को हटाने के लिए 20 अगस्त 2014 में एनजीटी में याचिका लगाई। कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर साल 2023 में फिर से याचिका लगाई। चिन्हाकंन और सीमांकन किया गया, लेकिन नदी के 33 मीटर दायरे व नदी में किए गए निर्माण नहीं हटाए गए। तत्कालीन नगरीय विकास के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने शपथ ली और दिसंबर 2023 तक नदी के दोनों तरफ हुए निमार्णों को हटाने और पौधारोपण करने को कहा, वो भी नहीं हुआ। अवैध निर्माण कम होने की वजह और बढ़ गए। कलियासोत डैम के कैचमेंट एरिया में हो रही अवैध निमार्णों को हटाने के लिए एनजीटी में याचिका लगी है, लेकिन अब तक कैचमेंट एरिया से निमार्णों को नहीं हटाया गया है।
डॉ. सुभाष सी. पांडेय, वरिष्ठ पर्यावरणविद्
सवाल : शहर के जलाशयों के कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं, हटाने की कार्रवाई कयों नहीं हो रही?
जवाब : शिकायतें मिलने पर प्रशासन की ओर से जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। बड़े तालाब सहित अन्य जलाशयों के आसपास अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई भी हुई है।
सवाल : बड़े तालाब, केरवा डैम के अलावा कलियासोत नदी व डैम के कैचमेंट एरिया में कई अवैध निर्माण हो गए हैं?
जवाब : बड़े तालाब का सीमांकन होना है। केरवा, कलियासोत डैम व नदी के कैचमेंट एरिया पर हुए निमार्णों की जांच कराई जाएगी।
सवाल : आखिर जलाशयों के कैचमेंट एरिया पर अवैध कब्जे कब रुकेंगे?
जवाब : जांच के बाद ही नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाएगी।