पल्लवी वाघेला, भोपाल। एग्जाम मोड ऑन है। एग्जाम के पहले घंटों की सिटिंग के कारण गर्दन और पीठ में दर्द..। तनाव, खान-पान में अरुचि सहित कई समस्याओं से स्टूडेंट गुजर रहे हैं। पैरेंट्स के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं है। ऐसे में एक्सपर्ट की राय है कि बच्चों को एक बात जरूर समझाएं कि उन्हें बेस्ट रिजल्ट लाने पर नहीं, बल्कि अपना बेस्ट देने पर फोकस करना है।इस विषय में पीपुल्स समाचार ने अलग-अलग एक्सपर्ट से बात की और उनके दिए टिप्स छात्रों के लिए शेयर कर रहे हैं...
कॉन्फिडेंस पर करें काम
( साइकोलॉजिस्ट डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार)
- साइकोलॉजिस्ट की मानें तो इस दौरान कॉन्फिडेंस की कमी सबसे बड़ी दिक्कत होती है। इसके लिए पैरेंट्स और टीचर दोनों की भूमिका अहम है।
- पैरेंट्स बच्चों पर उम्मीद न थोपें।
- बच्चे का सिलेबस पूरा नहीं है तो उसे मोटिवेट कर मदद करें।
- बच्चों को समझाएं कि कई ऐसे लोग हैं जिनके बोर्ड एग्जाम में नंबर कम थे, लेकिन वह जिंदगी में बेहतर कर रहे हैं।
- एग्जाम हॉल में टीचर की यह जिम्मेदारी है कि ॉकोई स्टूडेंट डरा-सहमा हुआ या तनाव में नजर आए तो उसे दिलासा दें। उसे रिलेक्स होने को कहें।
बदलें पढ़ाई का तरीका
(काउंसलर दिव्या दुबे मिश्रा के अनुसार)
- हर 1 घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें। घर में वॉक कर सकते हैं।
- कुछ नया पढ़ने में कंफ्यूज होने की संभावना अधिक है, इसलिए पढ़े हुए को मजबूत करें।
- छोटे नोट्स और माइंड मैप्स पर ध्यान दें। इससे सब्जेक्ट पर पकड़ मजबूत होगी।
- अच्छी नींद जरूर लें। खासकर जब अगले दिन एग्जाम हो। इससे परफॉर्मेंस में सुधार आता है।
- खाली वक्त में सोशल मीडिया की बजाए फिजिकल एक्टिविटी करें ताकि माइंड फ्रेश हो। ऐसे गेम से बचें जिसमें चोट लगने की संभावना होती है।
- स्क्रीन से दूरी बनाए रखें। यह पैरंट्स के लिए भी अहम है, वरना आपको देखकर बच्चे की इच्छा जागेगी।
सही पोस्चर जरूरी
(फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. कविता अहिरवार के अनुसार)
लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करने से बच्चों में फॉर्वड हेड पोस्चर यानी गर्दन का आगे की ओर झुकना और कूबड़ निकलने की समस्या, मस्कुलोस्केलेटल दर्द और कम उम्र में पीठ दर्द और जकड़न जैसी समस्या शुरू हो सकती है। रक्त संचार धीमा होने से थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस होती है।
- 20 का रुल अपनाएं। इसमें हर 20 मिनट की पढ़ाई के बाद 20 सेकंड के लिए खड़े हों और कम से कम 20 फीट दूर देखें।
- बच्चों की कुर्सी और मेज ऐसी होनी चाहिए कि उनके पैर जमीन पर टिके हों और कोहनियां 90 डिग्री पर रहें।
- दिन में दो बार कोबरा स्ट्रेच या केट एंड काउ स्ट्रेच जैसी एक्सरसाइज जरूर करें।
- एग्जाम हॉल में घबराहट होने पर खुद को रिलैक्स करने के लिए 4:4:4 का सूत्र अपनाएं। गहरी सांस लें।
- सांस को अंदर खींचने में यानी फेफड़ों में हवा भरने में 4 सेकंड लगाएं। फिर इसे 4 सेकंड के लिए होल्ड करें, फिर उस सांस को अगले 4 सेकंड तक रिलीज करें।
खानपान पर ध्यान
( डायटिशियन सोनाली श्रीवास्तव के अनुसार)
- खूब पानी पिएं, नारियल पानी और हर्बल चाय कारगर
- फल सब्जी में ग्रीन सब्जी और ताजे व मौसमी फल को तवज्जो दें
- प्रोटीन की कमी न होने दें। अंडे, दही, पनीर, दालें, अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) शामिल करें।
- मेवे के साथ ही चिया सीड्स और अन्य बीज आहार में शामिल करें।
- जंक फूड की जगह मिलेट्स को आहार में शामिल करें।
- एग्जाम के लिए जाने से पहले नाश्ता जरूर करें।
- चीनी-कैफीन व तला न खाएं।