नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बार सख्त मूड दिखाया। शीर्ष कोर्ट ने साफ कहा कि यदि किसी हमले में किसी को चोट पहुंचती है या जान चली जाती है, तो सिर्फ नगर निकाय ही नहीं, बल्कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
अगर मौत हुई तो 'डॉग फीडर' होगा जिम्मेदार
कुत्तों के हमले से मौत की इस सुनवाई में वकील रामचंद्रन ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह अवमानना से जुड़ी सुनवाई नहीं है, इसलिए वह कोर्ट की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे। इसके बजाय उन्होंने रेबीज नियंत्रण के उपायों, वैक्सीन की उपलब्धता और आवारा कुत्तों के हमलों से निपटने के लिए पेशेवरों की क्षमता विकसित करने जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
हालांकि इस पर शीर्ष कोर्ट ने सवाल किया कि चूंकि उनकी क्लाइंट एक एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट हैं और पहले कैबिनेट मंत्री भी रह चुकी हैं, तो इन योजनाओं को लागू करने के लिए बजट आवंटन में उनका क्या योगदान रहा है। वहीं याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि नसबंदी (स्टेरिलाइजेशन) से आवारा कुत्तों की आक्रामकता में कमी आती है, लेकिन अधिकांश शहरों में इसे प्रभावी ढंग से लागू ही नहीं किया जा रहा है।
SC- हमारी टिप्पणी को हल्के में न लें
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पिछली तारीख पर की गई टिप्पणियों को हल्के में लेना ठीक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहा है और जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की नाकामी साफ तौर पर सामने आई है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह निजी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद आज ही सुनवाई समाप्त करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को अपना पक्ष रखने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा।
इधर वरिष्ठ वकीले बोले- संविधान सभी जीवों के प्रति करुणा का निर्देश देता
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि संविधान सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का निर्देश देता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य और पशु के बीच टकराव से जुड़े मामलों में यह अदालत अब तक व्यापक रूप से वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती रही है। सिद्धार्थ दवे ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप नहीं लगाया जा रहा है।
उन्होंने इस मामले को लेकर हुए नकारात्मक प्रचार पर खेद जताते हुए कहा कि ऐसा करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि अंतिम फैसला माननीय न्यायालय को ही करना है और सुनवाई के बाहर आकर वीडियो या बयान जारी नहीं किए जाने चाहिए।




















