Shivani Gupta
20 Jan 2026
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें से अब तक किसी भी व्यक्ति की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है। SIR से जुड़ी सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि किसी एक राज्य, जैसे पश्चिम बंगाल, के तथ्यों को आधार बनाकर अन्य राज्यों की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाना सही नहीं है।
आयोग के मुताबिक, हर राज्य में यह प्रक्रिया स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तरीके से पूरी की गई है। आयोग ने जबरदस्ती या अत्यधिक जांच के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस पूरी कवायद में किसी भी स्तर पर पुलिस की भूमिका नहीं रही। मतदाता सूची के सत्यापन का काम केवल बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने घर-घर जाकर किया है और प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत संपन्न हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ये मतदाता 10 दिनों के भीतर अपने जरूरी दस्तावेज चुनाव आयोग के समक्ष जमा कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
बता दें यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में चस्पा की जाए, ताकि संबंधित मतदाता उसे देखकर समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकें या दस्तावेज जमा कर सकें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य किसी को मतदान के अधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है।