जेनेवा। अमेरिकी राष्ट्रपति बुधवार को स्विट्जरलैंड के दावोस जा रहे थे। लेकिन बीच रास्ते में ही उनके विमान में आई तकनीकि खामी की वजह से वापिस लौट गया, हालांकि कुछ देर बाद वह दूसरे प्लेन से रवाना हो गए। दूसरी ओर ट्रंप के विमान को डीसी इलाके में लैंड कराया गया। ट्रंप बुधवार को स्विजरलैंड में वर्ल्ड इकॉनोमिक फारम में भाग लेने जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप के एयरफोर्स-1 विमान ने मंगलवार शाम को स्विट्जरलैंड के लिए टैक-ऑफ किया था। हालांकि उड़ान के करीब 1 घंटे के अदर ही विमान जॉइंट बेस एंड्रयूज लौट आया। व्हाइट हाउसक की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि टेकऑफ के बाद विमान को वापिस लाने का फैसला किया गया। वहीं कैबिन क्रू ने जानकारी दी कि विमान में इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी पाई गी थी। जिसके बाद वापिस लौटने का फैसला किया।
वहीं विमान में मौजूद एक रिपोर्टर ने जानकारी दी कि विमान की प्रेस कैबिन की लाइटें कुछ समय के लिए बंद की गई। हालांकि ये क्यों किया गया इसका कारण नहीं बताया गया। आधे घंटे बाद बताया सगया कि विमान वापिस जा रहा है। वहीं ट्रंप अन्य विमान में सवार होकर दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फारम में शामिल होने रवाना हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जिस विशेष विमान से यात्रा करते हैं, उसे दुनिया भर में एयर फोर्स वन के नाम से जाना जाता है। फिलहाल इस फ्लीट में शामिल दो विमान पिछले लगभग 40 वर्षों से सेवा में हैं। इन्हें बदलने के लिए विमान निर्माता कंपनी बोइंग लंबे समय से नए एयर फोर्स वन प्रोग्राम पर काम कर रही है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं और लागत से जुड़े कारणों के चलते इस परियोजना में बार-बार देरी होती रही है।
एयर फोर्स वन को आम विमानों से बिल्कुल अलग बनाया गया है। इसे राष्ट्रपति के लिए हर तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिहाज से मॉडिफाई किया गया है। विमान में रेडिएशन से सुरक्षा, एंटी-मिसाइल सिस्टम, और अत्याधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क मौजूद हैं, जिससे राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने से सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में रह सकते हैं और तत्काल आदेश जारी कर सकते हैं।
इसी बीच, पिछले साल कतर के शाही परिवार ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट उपहार में दिया था। इस विमान को एयर फोर्स वन फ्लीट में शामिल किए जाने की योजना है। हालांकि, इस फैसले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर कई सवाल भी उठे थे।