Naresh Bhagoria
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Manisha Dhanwani
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बिलासपुर। न्यायधानी के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। 12 वर्षीय नाबालिग बेटे प्रथमेश ठाकरे और उसकी 5 वर्षीय बहन ने अपने संरक्षक मयंक वर्मा के माध्यम से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके पिता स्व. आलोक ठाकरे के अंतिम संस्कार के बाद उनकी मां खुशबू ठाकुर उर्फ अन्नू ठाकुर और मौसी ज्योति पाण्डेय ने मुक्तिधाम से अस्थियां चुरा ली हैं।
शिकायत के अनुसार, 15 जनवरी को पिता की मृत्यु के बाद भारतीयनगर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया था, लेकिन 17 जनवरी को दोनों आरोपी महिलाएं नियम विरुद्ध मुक्तिधाम में घुसीं और हिंदू रीति-रिवाजों को ताक पर रखकर पिता की अस्थियों को झोले में भरकर ले गईं, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। नाबालिगों का आरोप है कि उनकी मां दो साल पहले उन्हें छोड़कर चली गई थी, लेकिन अब पिता की मृत्यु के बाद करोड़ों की संपत्ति और रुपयों के लालच में वह वापस लौट आई है और अस्थियों का सहारा लेकर अंतिम क्रिया में बाधा डाल रही है ताकि बच्चों के हक की संपत्ति हड़पी जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नाबालिग शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से गुहार लगाई है कि उनके पिता की अस्थियां बरामद कर उन्हें सौंपी जाएं ताकि वे विधि-विधान से गंगा विसर्जन कर सकें। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ज्योति पाण्डेय पूर्व में भी अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार के समय विवाद कर चुकी हैं और उन्हें परिवार व समाज से पृथक किया जा चुका था।
बच्चों का आरोप है कि जिस मां ने संकट के समय उन्हें बेसहारा छोड़ दिया था, वह अब केवल धन के लोभ में आकर उनके धार्मिक अधिकारों का हनन कर रही है और उन्हें मानसिक प्रताड़ना दे रही है। इस हृदयविदारक घटना ने स्थानीय समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि सिविल लाइन पुलिस इस गंभीर शिकायत पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करती है और क्या उन मासूम बच्चों को उनके पिता की अस्थियां वापस मिल पाती हैं, ताकि वे अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए अंतिम तर्पण कर सकें।