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RSS में रिपीट हो सकता है सर कार्यवाह होसबाले का कार्यकाल

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RSS में रिपीट हो सकता है सर कार्यवाह होसबाले का कार्यकाल

भोपाल। पांच राज्यों में विधानसभा और अप्रैल-मई 2024 में लोकसभा चुनाव के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी यह चुनावी साल है। मार्च 2024 की प्रतिनिधि सभा में सर कार्यवाह का चुनाव होना है। आरएसएस का शताब्दी वर्ष समारोह और लोकसभा के आसन्न चुनावों के चलते इस बात की ज्यादा संभावना है कि मौजूदा सर कार्यवाह दत्तात्रय होसबाले का कार्यकाल रिपीट हो जाएगा। अगले सप्ताह से मप्र सहित सभी राज्यों में खंड कार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। दिसंबर में प्रांत और क्षेत्र कार्यवाह का चुनाव होगा जो कि सर कार्यवाह की चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे।

इस साल अंत तक मप्र सहित 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 की शुरूआत में लोकसभा के आम चुनाव होंगे। इसके अलावा संघ ने 2025 में अपने शताब्दी वर्ष के लिए साल भर के कार्यक्रम तय किए हैं। इतने महत्वपूर्ण घटनाक्रम को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि होसबाले इस पद पर पुन: चुन लिए जाएं। वैसे सह सरकार्यवाह पद पर भी होसबाले का कार्यकाल 2009 से 2021 तक रहा था। 2018 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। उस वर्ष भी संघ का चुनावी साल था तत्कालीन सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने पद छोड़ने की मंशा भी जताई थी लेकिन 2019 के चुनावों को देखते हुए सर्वसम्मति से संघ ने भैयाजी का कार्यकाल बढ़ा दिया था।

प्रांत कार्यवाह का चुनाव भी

संघ में हर तीन साल में खंड-जिला स्तर से चुनावी प्रक्रिया शुरू होती है। अगले कुछ दिन बाद सितंबर में निचले स्तर पर खंड कार्यवाह को चुनने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद विभाग संघ चालक और दिसंबर में प्रांत कार्यवाह फिर क्षेत्र कार्यवाह चुन लिए जाएंगे, ये पदाधिकारी अपनी नई टीम घोषित करेंगे। मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सर कार्यवाह का चुनाव होगा। इसी बैठक में संघ चालक का भी चुनाव किया जाएगा।

संघ प्रमुख के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद

संघ प्रमुख के बाद सर कार्यवाह का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिनिधि सभा में देश के सभी प्रांतों के करीब डेढ़ हजार प्रतिनिधि सर्व सम्मति से नए सर कार्यवाह का चुनाव करते हैं। चुनाव के लिए एक प्रक्रिया है जो कि चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षक की देखरेख में पूरी होती है। संघ के दैनंदिनी कामकाज के संचालन और नीतिगत निर्णयों में सरकार्यवाह की प्रमुख भूमिका रहती है।

(इनपुट-राजीव सोनी)
Javedakhtar Ansari
By Javedakhtar Ansari

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