Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाज़ार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती दिखाई थी, लेकिन दिन के अंत तक बाज़ार ने अपनी बढ़त गंवा दी और सेंसेक्स 271 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,450 के नीचे फिसल गया। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑटो, रियल्टी और आईटी शेयरों पर दबाव के कारण आई। हालांकि, एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, ऊर्जा और मीडिया क्षेत्र में खरीदारी बनी रही, जिससे कुछ हद तक बाजार बड़ी गिरावट से बचा रहा। निवेशकों की सबसे बड़ी नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज पर रही, क्योंकि कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में मुकेश अंबानी ने जियो के आईपीओ का ऐलान किया, जो 2026 की पहली छमाही में आएगा।
यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है, लेकिन बाजार की चिंता यह रही कि रिलायंस इंडिया का शेयर 2% टूट गया। दरअसल, निवेशकों को लगता है कि जियो और रिलायंस रिटेल के अलग-अलग लिस्टिंग के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज पर होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लग सकता है। यानी शेयर की कीमत में संभावित कटौती देखने को मिलेगी।
बाजार में दूसरी बड़ी हलचल रुपए की रही। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61 पैसे गिरकर 88.19 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसका सीधा असर आयात पर पड़ेगा, खासकर कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सामानों पर। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों के मूड को भी झटका देती है क्योंकि वे डॉलर में मुनाफा कमाने को प्राथमिकता देते हैं। आज के कारोबार में टॉप गेनर्स में एआरसी इंडस्ट्रीज एंड इसुलेटर्स, रिलैक्सो फुटवियर और ग्रैनुअल्स इंडिया रहे। इन कंपनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं वर्धमन टेक्सटाइल्स, विक्रम सोलर और आईडीबीआई बैंक जैसी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने उन कंपनियों में पैसा लगाया जिनका मुनाफा और बिज़नेस परिदृश्य मजबूत दिख रहा था, जबकि कमजोर संकेत वाली कंपनियों में बिकवाली हुई।
कुल मिलाकर देखा जाए तो शुक्रवार का कारोबार मिश्रित संकेतों वाला रहा। एक ओर निवेशकों को रिलायंस एजीएम से जियो आईपीओ की बड़ी घोषणा मिली, दूसरी ओर आरआईएल के शेयर में गिरावट और रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाना चिंता का विषय बन गया। अमेरिकी आयात शुल्क बढ़ाने की खबरों ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है, जिससे आगे की रैली पर रोक लग सकती है। विदेशी निवेशक भी सतर्क बने हुए हैं, खासकर डॉलर की मजबूती और अमेरिका-भारत के बीच व्यापारिक तनाव को देखते हुए। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
रिलायंस जियो आईपीओ जैसी बड़ी घटनाएं लंबी अवधि में सकारात्मक हो सकती हैं, लेकिन निकट भविष्य में डॉलर की मजबूती, रुपए की कमजोरी और वैश्विक व्यापारिक तनाव भारतीय बाजार को दबाव में रखेंगे। इसलिए, निवेशकों को चुनिंदा मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।