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शादी सुनते ही पसीना!क्यों Gen Z को ‘सेटल होना’ लगने लगा है सबसे बड़ा खतरा?

क्या शादी अब डर बन चुकी है? क्यों आज की Gen Z रिश्तों से पहले खुद को चुन रही है? करियर, आजादी, डेटिंग ऐप्स और विकल्पों की भरमार ने युवाओं की सोच पूरी तरह बदल दी है। जहां पहले ‘सेटल होना’ सफलता माना जाता था, वहीं आज वही शब्द फोबिया बन चुका है।
क्यों Gen Z को ‘सेटल होना’ लगने लगा है सबसे बड़ा खतरा?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    आज की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, शादी और लंबे रिश्तों को लेकर पहले जैसी जल्दबाजी में नहीं है। जहां पुराने समय में शादी को जीवन की स्थिरता और सफलता का पैमाना माना जाता था, वहीं आज सेटल होना कई युवाओं के लिए डर का कारण बन गया है। करियर, आजादी और खुद की पहचान ये तीन चीजें आज की जनरेशन की प्रायोरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।

    क्या है ‘सेटलिंग डाउन फोबिया’?

    सेटलिंग डाउन फोबिया का मतलब है किसी रिश्ते या शादी जैसी स्थायी जिम्मेदारी से घबराना। ऐसे लोग अक्सर रिश्ते में होते तो हैं, लेकिन जैसे ही शादी या भविष्य की बात आती है, वे पीछे हटने लगते हैं। कमिटमेंट का ख्याल उन्हें बेचैन कर देता है और वे रिश्ते से दूरी बनाने लगते हैं।

    क्यों बढ़ रहा है ये डर?

    1. करियर और पैसे का दबाव- आज के युवाओं पर पढ़ाई, नौकरी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी का भारी दबाव है। उनका मानना है कि पहले खुद को सेट करना जरूरी है, उसके बाद ही रिश्तों की जिम्मेदारी ली जाए। ऐसे में शादी का दबाव डर को और बढ़ा देता है।
    2. आजादी की चाह- Gen Z को अपनी स्पेस और फ्रीडम बेहद प्यारी है। उन्हें लगता है कि शादी या कमिटमेंट से उनकी आज़ादी खत्म हो सकती है। यही सोच धीरे-धीरे फोबिया का रूप ले लेती है।
    3. विकल्पों की भरमार- डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने विकल्पों की बाढ़ ला दी है। जब हर वक्त बेहतर ऑप्शन सामने दिखता है, तो किसी एक रिश्ते पर टिक पाना मुश्किल हो जाता है। मन में डर रहता है कि कहीं सेटल होकर कुछ अच्छा मिस न हो जाए।
    4. रिश्तों को लेकर नई सोच- आज की जनरेशन शादी को मजबूरी नहीं, बल्कि एक पर्सनल चॉइस मानती है। वे बराबरी, समझ और स्पेस वाला रिश्ता चाहते हैं बिना किसी सामाजिक दबाव के।

    कमिटमेंट फोबिया के लक्षण

    • रिश्ते में जल्दी बोर होना
    • भविष्य की बातों से घबराना
    • छोटी बातों पर झगड़ा करना
    • पार्टनर से इमोशनल दूरी बनाना
    • हमेशा किसी बेहतर इंसान की तलाश में रहना

    इससे कैसे निपटें?

    • खुद को समझें- सबसे पहले ये जानने की कोशिश करें कि डर किस बात का है आजादी खोने का या रिश्ते में फेल होने का।
    • खुलकर बात करें- अपने पार्टनर से अपने डर शेयर करें। सही बातचीत कई गलतफहमियां दूर कर सकती है।
    • धीरे-धीरे आगे बढ़ें- बड़े फैसले जल्दबाजी में न लें। छोटे कदम लें और रिश्ते को समय दें।
    • जरूरत हो तो मदद लें- अगर डर बहुत ज्यादा है, तो काउंसलर या थेरेपिस्ट से बात करने में हिचकिचाएं नहीं।
    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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