Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

E20 पेट्रोल के 893 नमूने जांच में पास, एथेनॉल की मात्रा और माइलेज पर कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर सवाल

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक देशभर से लिए गए E20 petrol के 893 नमूने तय सीमा में मिले। कर्नाटक के 26 से 31 फीसदी एथेनॉल के दावे को केंद्र ने खारिज किया।
E20 पेट्रोल के 893 नमूने जांच में पास, एथेनॉल की मात्रा और माइलेज पर कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर सवाल

 E20 petrol में तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल का दावा खारिज हो गया है। केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने कर्नाटक के दावे नकार दिए।पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक 893 नमूनों की जांच हुई। ये नमूने 27 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से लिए गए। सभी नमूने 19 से 21 प्रतिशत की तय सीमा में मिले।

 ये है पूरा मामला

कर्नाटक सरकार के एक विभाग ने दावा किया था। राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में एथेनॉल 26 से 31 प्रतिशत था। E20 पेट्रोल में एथेनॉल की तय सीमा 19 से 21 प्रतिशत है। इसी एथेनॉल में पेट्रोल की मात्रा पर पूरा विवाद टिका है। मंत्रालय ने कर्नाटक के इन दावों का खंडन किया।

E20 पेट्रोल: 893 नमूनों का नतीजा

कर्नाटक से लिए गए 56 नमूनों में एथेनॉल की औसत मात्रा 19.30 प्रतिशत रही। यह मात्रा तय सीमा के भीतर है। मंत्रालय के मुताबिक 893 में से एक भी नमूना सीमा से बाहर नहीं मिला।

अब 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने E100 फ्यूल को दी मंजूरी

कर्नाटक में पेट्रोल सैंपल की जांच पर क्या मिला

कर्नाटक में पेट्रोल सैंपल की जांच 7 जिलों के नमूनों पर आधारित बताई गई। इनमें बेंगलुरु अर्बन भी शामिल था। नतीजों में इंडियन ऑयल के पेट्रोल में सबसे ज्यादा 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला। इसके दूसरे नमूने में 20.8 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पावर पेट्रोल में 30.5 और सामान्य पेट्रोल में 27 प्रतिशत मिला। भारत पेट्रोलियम के स्पीड पेट्रोल में 26.5 प्रतिशत एथेनॉल दर्ज हुआ। अन्य सैंपल में 24.2 और 22.6 प्रतिशत मिला।

नायरा के पेट्रोल में 26.1 प्रतिशत एथेनॉल दर्ज हुआ। शेल में 25.5 प्रतिशत मिला। एमआरपीएल (MRPL – Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited) के पेट्रोल में 19.2 प्रतिशत तक रहा। ये आंकड़े कर्नाटक सरकार की जांच के हैं।

राहुल बोले, E20 अब 420 बन गया

अब जरा पीछे चलते हैं। मंत्रालय के बयान से एक दिन पहले राहुल ने X पर पोस्ट किया था कि E20 अब 420 बन गया है, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है। राहुल के मुताबिक कर्नाटक सरकार ने 7 जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल लिए। मान्यता प्राप्त लैब में 11 सैंपल में एथेनॉल 20 प्रतिशत से ज्यादा मिला।

E20 Petrol: सरकार का दावा- इससे इंजन खराब नहीं होता, 23 करोड़ से ज्यादा वाहन बिना परेशानी दौड़ रहे

पेट्रोल का माइलेज और मरम्मत का खर्च

राहुल ने तीन बातें रखीं-

  • पहली चिंता यह है कि petrol mileage घट सकता है। मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है। राहुल के मुताबिक वाहन इतने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए नहीं बने।
  • दूसरी बात ग्राहक से जुड़ी है। राहुल का कहना है कि ग्राहकों को मात्रा नहीं बताई जा रही। उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता।
  • तीसरी बात देशभर की असल मात्रा की है। उन्होंने तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई मांगी।

तेल कंपनियों ने जांच पर उठाए सवाल

तेल कंपनियों ने राज्य की Karnataka petrol sample test पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक जांच तय नियमों के तहत नहीं हुई। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक देशभर में सप्लाई हो रहा पेट्रोल तय मानक पर खरा है।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का मानक क्या है

बीआईएस (BIS – Bureau of Indian Standards) ने आईएस 17021 मानक तय किया है। यह मानक ethanol blended petrol के लिए बना है।

कंपनियों ने अक्टूबर में लिए गए सैंपल की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक 2005 का सरकारी आदेश नियम तय करता है। 2024 की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (बिक्री अनुशासन के नियम) भी इसमें शामिल हैं।

इनमें सैंपल लेने, सुरक्षित रखने, जांच कराने और रिपोर्ट देने की प्रक्रिया लिखी है। कंपनियों ने डेंसिटी (घनत्व) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, एथेनॉल पेट्रोल से ज्यादा भारी होता है। जांचे गए नमूनों की डेंसिटी कम दर्ज हुई।

रिजवान अरशद का सवाल: कितना एथेनॉल?

कर्नाटक सरकार के एक मंत्री ने भी केंद्र से जवाब मांगा। वह खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं।

"केंद्र सरकार को देश की जनता के सामने साफ करना चाहिए कि उन्हें असल में कितना एथेनॉल वाला ईंधन दिया जा रहा है।"
– रिजवान अरशद, मंत्री, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, कर्नाटक सरकार

कर्नाटक का दावा: 1 लाख करोड़ रुपए का नुकसान

कर्नाटक सरकार ने दो अनुमान रखे हैं। पहला अनुमान पेट्रोल का माइलेज 10 प्रतिशत घटने की शर्त पर आधारित है। इसमें वाहन मालिकों को सालाना 62,000 करोड़ रुपए का नुकसान बताया गया। (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)

दूसरा अनुमान मेंटेनेंस (रखरखाव) के अतिरिक्त खर्च का है। इंजन खराब होने और बार-बार सर्विसिंग से 39,000 करोड़ रुपए का बोझ बताया गया। (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है) 62,000 करोड़ रुपए सालाना का मतलब रोजाना करीब 170 करोड़ रुपए। ऐसे में दोनों पक्षों के नतीजों में बड़ा अंतर साफ दिखता है।

Jitendra Shrivastava
By Jitendra Shrivastava

Latest Posts