सीहोर में शिक्षक ने किया सराहनीय कार्य, 8 हजार रुपए जुटाए; 800 फीट दूर डीपी से स्कूल तक पहुंचाई बिजली

सीहोर। स्कूल में करीब 90 प्रतिशत समय बिजली उपलब्ध नहीं रहने से स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यम से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। समस्या के स्थायी समाधान के लिए शिक्षकों ने आपसी सहयोग से करीब ₹8 हजार जुटाए और विद्यालय से लगभग 800 फीट दूर स्थित नई डीपी से स्कूल तक विद्युत व्यवस्था कराई।
पास खंभा था, फिर भी स्कूल अंधेरे में
विद्यालय के पास पहले से बिजली का खंभा मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद स्कूल में नियमित विद्युत आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। पिछले कई दिनों से स्थिति इतनी खराब थी कि करीब 90 प्रतिशत समय बिजली उपलब्ध नहीं रहती थी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। खासकर स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों से पढ़ाई के दौरान बिजली गुल होने से पूरी शिक्षण गतिविधि बाधित हो जाती थी।
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डिजिटल कक्षा में बार-बार टूटता था पढ़ाई का सिलसिला
स्मार्ट क्लास में डिजिटल कंटेंट, वीडियो और अन्य तकनीकी माध्यमों से पढ़ाई कराई जाती है। बिजली चले जाने पर शिक्षक और विद्यार्थियों को कक्षा रोककर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता था। इससे न केवल समय बर्बाद होता था, बल्कि बच्चों की सीखने की निरंतरता भी टूटती थी। विद्यालय प्रबंधन की ओर से समस्या के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर शिकायत और प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
800 फीट दूर डीपी से निकाली नई राह
बच्चों की पढ़ाई को लगातार प्रभावित होते देख प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना और विद्यालय स्टाफ ने समस्या का इंतजार करने के बजाय खुद समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया। विद्यालय से करीब 800 फीट दूर स्थापित नई डीपी से स्कूल तक विद्युत लाइन पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके लिए शिक्षकों ने आपसी सहयोग से लगभग ₹8 हजार की राशि एकत्रित की और करीब 800 फीट केबल की व्यवस्था कराई।
शिक्षकों ने कहा-बच्चों की पढ़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता
शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने का वास्तविक लाभ तभी विद्यार्थियों को मिल सकता है, जब उनका नियमित उपयोग हो। बिजली की समस्या के कारण यदि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो उसका समाधान करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ स्टाफ ने सामूहिक रूप से आगे बढ़कर व्यवस्था को स्थायी बनाने का निर्णय लिया।
अब स्मार्ट क्लास से लेकर पंखे-लाइट तक मिलेगी सुविधा
नई डीपी से विद्युत व्यवस्था जुड़ने के बाद विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, वीडियो आधारित शिक्षण और शैक्षणिक प्रस्तुतियों का संचालन सुचारु रूप से हो सकेगा। इसके साथ ही कक्षाओं में लगे पंखे और लाइट, पेयजल व्यवस्था तथा विद्यालय की अन्य आवश्यक विद्युत सुविधाओं का भी बेहतर संचालन हो सकेगा। यानी शिक्षकों की पहल का सीधा लाभ बच्चों की रोजमर्रा की पढ़ाई और सुविधा पर पड़ेगा।
आठ शिक्षकों ने मिलकर निभाई जिम्मेदारी
इस पहल में प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना के साथ शिक्षक शैलेंद्र सिंह, देवेंद्र चौहान, देवकरण मालवीय, शशिकला पांडे, फूलवती सेन, माधुरी जोशी और शशिवाला नामदेव ने सहयोग दिया। सभी ने अपनी ओर से योगदान देकर विद्यालय की बिजली समस्या के स्थायी समाधान में भूमिका निभाई।
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बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए बनी प्रेरणा
प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि किसी भी कारण से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। बिजली की समस्या के कारण डिजिटल शिक्षा बाधित हो रही थी, इसलिए सभी शिक्षकों ने मिलकर स्थायी समाधान का प्रयास किया। स्कूल से करीब 800 फीट दूर नई डीपी से विद्युत व्यवस्था जोड़ने में सभी ने सहयोग दिया। शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यालय की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी उनकी जिम्मेदारी है।



















