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RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, भोपाल कोर्ट में लगाई थी अर्जी, वकील ने कार्रवाई को बताया गलत

भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने खारिज कर दी है। इस मामले में आज ही सौरभ ने अपने वकील राकेश पाराशर के जरिए अग्रिम जमानत याचिका फाइल की थी। इस पर कल सुनवाई होनी थी, लेकिन वकील के विशेष अनुरोध पर जज ने आज ही सुनवाई कर दी और सौरभ शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया।

वकील बोला- सौरभ लोकसेवक नहीं है

सौरव शर्मा के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उसे लोक सेवक मानते हुए एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया।

वहीं वकील राकेश पाराशर ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लोकायुक्त की कार्रवाई को गलत बताया है। पाराशर के मुताबिक, सौरभ लोकसेवक नहीं है। इसके बाद भी लोकायुक्त ने उसके घर छापा मारा। यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है। जिस कार में सोना मिला, उससे सौरभी का कोई लेना-देना नहीं है।

लुक आउट नोटिस जारी

बता दें कि आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के खिलाफ जांच एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए बुधवार को लुक आउट सर्कुलर नोटिस भी जारी किया जा चुका है, ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके।

आरक्षक से करोड़पति बनने का सफर

2016 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत आरक्षक बने सौरभ शर्मा ने ग्वालियर स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय में शुरुआत की। कुछ ही समय में उसने चेकपोस्ट पर पोस्टिंग करा ली और भ्रष्टाचार का नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया। 2019 में भोपाल स्थानांतरित होने के बाद सौरभ ने तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ नजदीकी बढ़ाई। इस दौरान चेकपोस्टों पर अवैध वसूली के कई आरोप लगे। शिकायतों के बावजूद सौरभ का नेटवर्क मजबूत होता गया। चेकपोस्टों पर अवैध वसूली का सिलसिला यूं था कि, उस समय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी नागपुर के भाजपा नेताओं की शिकायत के आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को अवैध वसूली के संबंध में पत्र लिखा था। इस वसूली में सौरभ शर्मा एक मुख्य कड़ी था। इस हाईप्रोफाइल केस में बड़े पैमाने पर कैश और बहुमूल्य वस्तुओं की बरामदगी के बाद अब राजनीतिक गलियारों में सौरभ से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की नजदीकी की चर्चा चल रही है।

कुछ दिन पहले सौरभ शर्मा पर किए गए सवाल को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मीडियाकर्मियों पर बिफर गए थे।

ईडी और आयकर विभाग की कार्रवाई में खुलासे

19 दिसंबर को सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी में 8 करोड़ रुपए नकद और 235 किलो चांदी की बरामदी की गई थी। इसके अलावा, भोपाल के मेंडोरी इलाके में लावारिस कार से 11 करोड़ रुपए कैश और 40 करोड़ रुपए कीमत का सोना मिला। जिस कार में यह बरामदगी की गई, वो सौरभ शर्मा के करीबी चेतन सिंह गौर की थी। इस पर आरटीओ लिखा नंबर प्लेट भी लगा हुआ था। इन खुलासों से साफ है कि सौरभ सिर्फ मोहरा था और असली खेल रसूखदार नेताओं और अधिकारियों का था। बताया जाता है परिवहन विभाग के कई आला अधिकारी और कुछ नेता लगातार सौरभ शर्मा के संपर्क में थे और अपनी काली कमाई उसी के माध्यम से ठिकाने लगा रहे थे।

भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच कैसे मिला वीआरएस

सौरभ शर्मा ने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली, जो अब संदेह के घेरे में है। आरोप है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद उसे वीआरएस क्यों और कैसे दिया गया। सूत्र बताते हैं कि वीआरएस के बाद भी सौरभ परिवहन मंत्री और आयुक्त के लिए काम करता रहा और विभाग के काले धन का लेन-देन संभालता रहा। बताया जाता है परिवहन विभाग में पदस्थ रहते हुए, सौरभ शर्मा के खिलाफ शिकायत की गई थी। ऐसे में उसने वीआरएस ले लिया था ताकि वह जांच एजेंसियों से बच सकें।

मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में गहराई से जांच के आदेश दिए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियां अब सौरभ के नेटवर्क और उससे जुड़े नेताओं व अधिकारियों की पड़ताल में जुटी हैं।

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