Manisha Dhanwani
16 Jan 2026
Naresh Bhagoria
16 Jan 2026
Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के लिए अहम पहल की है। इसके तहत 1 करोड़ रुपए तक के एमएसएमई ऋणों के लिए एक मानकीकृत डिजिटल प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है। इस पहल का मकसद ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करना, पारदर्शिता बढ़ाना और छोटे कारोबारियों को बार-बार बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने से राहत देना है। इस नई व्यवस्था के तहत पूरा लोन प्रोसेस सरकार के जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। जनसमर्थ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे सरकार द्वारा प्रायोजित क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं के लिए विकसित किया गया है। इस पोर्टल की खास बात यह है कि यह अलग-अलग स्रोतों से उधारकर्ता की जानकारी अपने आप प्राप्त कर सकता है। इसमें क्रेडिट स्कोर, आयकर रिटर्न, जीएसटी डेटा और बैंक खाते से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। इससे बैंकों को ग्राहक की वित्तीय स्थिति समझने में आसानी होती है और लोन अप्रेजल की प्रक्रिया अधिक वस्तुनिष्ठ और तेज हो जाती है।
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बैंकों का मानना है कि इस डिजिटल सिस्टम के जरिए लोन आवेदन की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। अभी तक अलग-अलग बैंकों की अपनी-अपनी प्रक्रियाएं होने के कारण कई बार लोन आवेदन खारिज हो जाते थे या निर्णय में देरी होती थी। जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया लागू होने से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि सही पात्र उधारकतार्ओं के लोन रिजेक्ट होने की संभावना भी कम होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सेक्टर को लगभग 26.43 लाख करोड़ रुपए के ऋण वितरित किए गए, जो करीब 1.3 करोड़ खातों के जरिए दिए गए थे। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। सरकार की यह पहल उसी व्यापक एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत एमएसएमई को मजबूत करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और डिजिटल माध्यमों से वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाना शामिल है।
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जनसमर्थ पोर्टल के जरिए उधारकतार्ओं को यह सुविधा भी मिलेगी कि वे एक ही जगह पर अलग-अलग बैंकों के विकल्प देख सकें और जरूरत के अनुरूप बैंक का चुनाव कर सकें। इसके साथ ही, उनका लोन आवेदन किस चरण में है, इसकी जानकारी भी उन्हें आॅनलाइन मिलती रहेगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का भरोसा भी मजबूत होगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच एमएसएमई को दिए गए नए ऋणों में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 32.5 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 17.7 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका अहम रही है। बैंकों की सुरक्षित ऋण देने की रणनीति और एमएसएमई की परिभाषा में किए गए बदलावों ने भी इस वृद्धि में योगदान दिया है। कुल मिलाकर, सरकार और बैंकों की यह संयुक्त पहल एमएसएमई सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। डिजिटल, तेज और मानकीकृत ऋण प्रक्रिया से छोटे और सूक्ष्म कारोबारियों को समय पर पूंजी मिलेगी, जिससे वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर देश की आर्थिक वृद्धि में अपना योगदान दे सकेंगे।