Aniruddh Singh
15 Jan 2026
Aniruddh Singh
15 Jan 2026
Aniruddh Singh
15 Jan 2026
नई दिल्ली। मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। उद्योग विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दो माह में स्मार्टफोन, टेलीविजन और लैपटॉप की कीमतों में 4 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले, नवंबर-दिसंबर माह में भी, इन उत्पादों की कीमतों में 3 से 21 प्रतिशत तक की तेज बढ़ोतरी हो चुकी है। कुल मिलाकर यह स्थिति एक बड़े प्राइस शॉक की ओर इशारा करती है, जिसका असर मांग और बिक्री दोनों पर पड़ना तय है। इस मूल्य वृद्धि की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की कीमतों में असाधारण तेजी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की खपत तेजी से बढ़ी है। इस वजह से इसकी आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। दबाव की वजह से इनकी कीमतें लगातार तेजी देखने को मिल रही है। बाजार पर नजर रखने वाली संस्था काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, मेमोरी मार्केट इस समय हाइपर-बुलिश है। पिछली तिमाही में कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद मौजूदा तिमाही में इसमें 40-50 फीसदी और बढ़ोतरी हो सकती है।
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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल-जून के दौरान इसमें 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर, स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर देखने को मिल रहा है। कुछ ब्रांड्स ने जनवरी में ही अपने फोन के दाम 3,000 से 5,000 रुपए तक बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ कंपनियां कीमतें सीधे न बढ़ाकर कैशबैक और डिस्काउंट कम करने जैसी अप्रत्यक्ष रणनीतियां अपना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा और 2026 में मेमोरी चिप्स की कीमतें ऊंची बनी रहने वाली हैं। ऐसे में नई लॉन्च होने वाली डिवाइसेज की कीमतें पहले से ज्यादा तय की जाएंगी और कुछ मामलों में कंपनियां कीमत वही रखते हुए कुछ फीचर्स या कंपोनेंट्स की गुणवत्ता में कटौती की जा सकती है। सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि टीवी और लैपटॉप निमार्ता भी इस संकट से जूझ रहे हैं। कुछ टीवी ब्रांड्स को अपनी जरूरत का केवल दसवां हिस्सा ही मेमोरी चिप्स के रूप में मिल पा रहा है। इसके चलते कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं। नवंबर में जहां करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, वहीं जनवरी में 10 प्रतिशत तक दाम बढ़ाए गए हैं। फरवरी में एक और बढ़ोतरी की तैयारी है। इस वजह से अगले दिनों में होने वाली बिक्री में डिस्काउंट काफी सीमित रहने की संभावना है।
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खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, लैपटॉप की कीमतें पहले ही 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं और बड़े टीवी ब्रांड्स भी जल्द ही कीमतें बढ़ाने के संकेत दे चुके हैं। मोबाइल रिटेलर्स के संगठन के मुताबिक, आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कुल कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। इससे खासतौर पर 20,000 रुपए से कम कीमत वाले सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जो देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला सेगमेंट है। उपभोक्ता पहले ही ठहरो और देखो की स्थिति में हैं, जिससे बाजार में मांग कमजोर पड़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कीमत वृद्धि के चलते 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट में 10 से 12 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने कंपनियों की लागत को और बढ़ा दिया है। कुल मिलाकर, महंगे होते मेमोरी चिप्स ने इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका असर न सिर्फ कंपनियों बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी साफ दिखाई देने वाला है।