Manisha Dhanwani
16 Jan 2026
Naresh Bhagoria
16 Jan 2026
भोपाल। वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केन्द्रित देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत भवन के इस परिसर में महाभारत जैसा भव्य समागम के आयोजन के लिए मैं संस्कृति विभाग और वीर भारत न्यास को बधाई देता हूं। डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष से पहले संवाद और शक्ति से पहले करुणा का चयन ही सच्चा धर्म है।
डॉ. यादव ने कहा कि महाभारत केवल युद्ध का आख्यान नहीं, बल्कि मानवता को विवेक, संवाद और शांति का मार्ग दिखाने वाला महाकाव्य है। आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब महाभारत का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती से इस समागम के माध्यम से हम विश्व को यह संदेश दे रहे हैं कि सभ्यताओं का भविष्य टकराव में नहीं, बल्कि सहअस्तित्व और औदार्य में सुरक्षित है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत से जोड़ेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ को राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनाना उसी सांस्कृतिक चेतना का आधुनिक स्वरूप है, जिसकी जड़ें महाभारत जैसे ग्रंथों में हैं। यह समागम उस चेतना को वैचारिक धरातल प्रदान करता है और राष्ट्र को उसकी बौद्धिक विरासत से जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समागम भारत की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करता है और नई पीढ़ी को अपनी सभ्यतागत विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।

शुभारंभ अवसर पर इंडोनेशिया के प्रतिष्ठित नाट्य समूह द्वारा प्रस्तुत 'भीष्म' नाट्य प्रस्तुति तथा 'कर्मचक्र की गाथा' ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने इमर्सिव डोम थियेटर, प्रदर्शनियां नेपथ्य, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह एवं पताकाएं, भारतीय कठपुतली, श्रीकृष्णपाथेय न्यास की पत्रिका एवं वेबसाइट तथा वीर भारत न्यास के प्रकाशन- सभ्यताओं की सांस (वैश्विक कविताओं का संकलन), भूली बिसरी सभ्यताएं पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
इस अवसर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि हमने भारत की धर्मभूमि पर जो विश्व का पहला युद्ध हुआ है महाभारत उसके माध्यम से सभ्यताओं के संघर्ष और उनकी उदारता की महागाथा को रेखांकित करने का, उन्हें याद करने का और उनके माध्यम से सफलता के रास्ते खोजने का संकल्प लिया है।यह भी सुखद संयोग की बात है कि इसे हम कलाओं के एकमात्र घर भारत भवन में कर रहे हैं। हम यहां महाभारत के प्रसंगों को याद करने का प्रयास कर रहे हैं। इस अनूठे अनुष्ठान में इंडोनेशिया, जापान, श्रीलंका से और भारत के तमाम हिस्सों से कलाकार, साहित्यकार मनीषी, चिंतक इसमें सहभागी होने आए हैं। हमारी कोशिश यह बताना है कि महाभारत केवल युद्ध या संहार का संदेश नहीं देता। यह शांति का, विकास का, आध्यात्मिक ऊर्जा का एक तरह का पड़ाव था, जिसमें भगवान कृष्ण के शांति का संदेशन नहीं सुनने के कारण इतने बड़े संहार की घटना हुई।
वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार रायसेन की दीक्षा सिंह एवं भोपाल की हिमांशी मिश्रा (रूपए राशि एक लाख का पुरस्कार) के साथ ही ग्वालियर की मान्या भटनागर, छिंदवाड़ा के गोविंद सिंह को नगद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
वीर भारत न्यास एवं अमर्त्यलोक टेल्स, मुंबई द्वारा आयोजित इमर्सिव डोम थिएटर भारत का पहला पौराणिक डोम थियेटर प्रस्तुत किया गया। डोम थिएटर में पहली प्रस्तुति है नारायणः सर्वम्, जो भगवद्गीता के 12वें अध्याय पर आधारित 6 मिनट की एक इमर्सिव फिल्म है, जिसका समापन श्रीकृष्ण के विराट विश्वरूप दर्शन के साथ होता है। इस फिल्म में श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी सुप्रसिद्ध अभिनेता सौरव राज जैन ने दी है, जिन्होंने टेलीविजन पर कई बार श्रीकृष्ण की भूमिका निभाकर विशेष पहचान बनाई है।





पूर्वरंग | सायं 05:00 बजे
दु:शासन वध - कथकली नृत्य शैली
निर्देशक- कल्याण कृष्ण नायर,
द इंटरनेशनल सेंटर फॉर कथकली, नई दिल्ली
अंतरंग | सायं 06:00 बजे
उर्वशी- नृत्य नाट्य प्रस्तुति
निर्देशक- टिकेन सिंह, इम्फाल, मणिपुर
प्रोगेसिव आर्टिस्ट लेबोरेटरी, इम्फाल
शिखंडी- नाट्य प्रस्तुति
निर्देशक – हिमांशु श्रीवास्तव
नाट्य चित्रा आर्ट कंपनी, दिल्ली
बहिरंग | सायं 07:30 बजे
पांचाली - संगीत नाट्य प्रस्तुति
अरियारत्ने कालूराच्ची
एके फोक आर्ट रिसर्च सेंटर, कोलंबो, श्रीलंका