ईरान युद्ध के बीच हूती हमलों से दहला सऊदी अरब, बंकर वाले महलों और बहुत ज्यादा सुरक्षा के बीच रह रहे क्राउन प्रिंस MBS

Saudi Crown Prince Bunker News: वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक मोहम्मद बिन सलमान कड़ी सुरक्षा में महलों के बीच आ-जा रहे, रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 12 की मौत। सऊदी अरब अपने अहम बुनियादी ढांचे और आर्थिक संपत्तियों को हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों से बचाने के लिए जूझ रहा है।
ईरान युद्ध के बीच हूती हमलों से दहला सऊदी अरब, बंकर वाले महलों और बहुत ज्यादा सुरक्षा के बीच रह रहे क्राउन प्रिंस MBS
बंकर वाले महलों और बहुत ज्यादा सुरक्षा के बीच रह रहे क्राउन प्रिंस MBS

वॉशिंगटन। हूती हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बंकरों से लैस और हाई सिक्योरिटी वाले महलों के बीच मूव कर रहे हैं।  ईरान युद्ध से जुड़े व्यापक संघर्ष के बीच सऊदी को हूती विद्रोहियों के नए हमलों का लगातार सामना कर रहा है वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार क्राउन प्रिंस आखिरी बार मंगलवार को पब्लिक में तब दिखे थे जब उन्होंने एक राष्ट्रीय दान अभियान के तहत ब्लड डोनेट किया था।

स्पेशल टीम तैनात की गई

रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि 41 वर्षीय क्राउन प्रिंस की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल सिक्योरिटी टीम तैनात की गई है। टीम उनके मूवमेंट पर नजर रख रही है। सऊदी अरब अपने अहम बुनियादी ढांचे और आर्थिक संपत्तियों को हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों से बचाने के लिए जूझ रहा है। हाल ही में रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों की एक मिसाइल गिरी, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। इस हमले में कई लोगों की हालत गंभीर है। ईरान युद्ध से जुड़े संघर्षों में अमेरिका या उसके खाड़ी सहयोगियों पर यह अब तक का सबसे घातक हमला बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक हूती विद्रोहियों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कम से कम चार बार हमला किया है। प्रिंस मोहम्मद ने 2015 में सऊदी अरब को यमन के गृह युद्ध में शामिल किया था और हूती विद्रोहियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया था। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस हस्तक्षेप में विनाशकारी हवाई हमले शामिल थे। सऊती के इस कदम ने संघर्ष को और तेज कर दिया। इससे सऊदी अरब के खिलाफ हूती विद्रोहियों के अभियान को और हवा  मिली।  इसमें तेल सुविधाओं और रियाद जैसे शहरों पर हमले भी शामिल थे।

साउथ कोरिया की हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला सफल टेस्ट, 6,174 KM/HR से ज्यादा रफ्तार में बदला रास्ता

सीजफायर पर सहमति बनी थी

2022 में सीजफायर पर सहमति बनने से पहले दोनों पक्षों के बीच लड़ाई बेनतीजा खत्म हुई थी। हिंसा का यह नया दौर ऐसे वक्त में शुरू हुआ है जब प्रिंस मोहम्मद ईरान के साथ टकराव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। युद्ध की शुरुआत में तेहरान के हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में एयरपोर्ट समेत एनर्जी सुविधाओं और आर्थिक संपत्तियों की कमजोरी को उजागर कर दिया था। सऊदी अरब अपने विशाल क्षेत्र में एयर डिफेंस कवरेज देने के लिए भी जूझ रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि सऊदी अरब महलों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस बैटरी को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर रहा है।

अमेरिका बच रहा हूतियों से सीधी लड़ाई से

सऊदी अरब हूती हमलों से निपटने में अमेरिका की ज्यादा सीधी भूमिका भी चाहता है। वाशिंगटन ने सऊदी के नेतृत्व वाले हमले के लिए खुफिया जानकारी साझा करने, टारगेट की पहचान करने और प्लानिंग में मदद दी है। लेकिन अब तक विद्रोहियों के खिलाफ सीधे हमले करने से बचता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए घातक हमले के बाद वह हूतियों के खिलाफ मिलिट्री एक्शन पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के दखल से संघर्ष और बढ़ सकता है और दुनिया के अहम शिपिंग रूट पर खतरा पैदा हो सकता है।

शिपिंग को रोक सकते हैं हूती

हूती बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से होने वाले ट्रैफिक को बाधित करने की कोशिश कर सकते हैं। यह यमन के पास लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इस तरह की रुकावट से ग्लोबल ऑयल सप्लाई और सीमित हो सकती है। यह पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की कोशिशों से प्रभावित है। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरता था। हूतियों ने पिछले महीने बाब अल-मंदेब के पास अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया था। गौरतलब है कि सऊदी के नेतृत्व वाला गठबंधन, जो यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

Latest Posts