साउथ कोरिया की हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला सफल टेस्ट, 6,174 KM/HR से ज्यादा रफ्तार में बदला रास्ता

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया ने अपने घरेलू स्तर पर विकसित हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) का पहला सफल परीक्षण किया है। अक्टूबर 2026 में हुए इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की गति से उड़ान भरी। इस दौरान उसने अपने रास्ते में बदलाव करते हुए समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। दक्षिण कोरिया की इस सफलता को उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है, जब उत्तर कोरिया भी अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को विकसित करने में जुटा है।
बूस्टर से अलग होने के बाद बदला उड़ान का रास्ता
परीक्षण के दौरान हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन ने बूस्टर से अलग होने के बाद अपना निर्धारित उड़ान पथ पूरा किया। मिसाइल ऊंचाई से नीचे उतरी और उड़ान के दौरान क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों दिशाओं में अपना रास्ता बदलते हुए लक्ष्य तक पहुंची। इस परीक्षण के जरिए उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और मिसाइल को नियंत्रित करने वाली तकनीक की जांच की गई। तेज गति के साथ उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता इस हथियार की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने खुद देखा परीक्षण
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस परीक्षण को खुद देखा। दक्षिण कोरिया इस हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को कोरियाई प्रायद्वीप पर मौजूद महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अचानक और सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक हथियार के रूप में देख रहा है। इस सफलता से दक्षिण कोरिया की रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। देश इस तकनीक को अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उत्तर कोरिया से बढ़ रही हाइपरसोनिक मिसाइल की होड़
दक्षिण कोरिया का यह परीक्षण उत्तर कोरिया की बढ़ती मिसाइल क्षमताओं के बीच हुआ है। उत्तर कोरिया ने 2022 में अपना पहला सफल हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन परीक्षण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के एक महीने में उत्तर कोरिया ने दो परीक्षण लॉन्च किए हैं, जिनसे उसकी क्षमताओं को उन्नत करने की कोशिशों का पता चलता है। ऐसे में दक्षिण कोरिया की यह उपलब्धि दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर दोनों देशों की गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
क्या है हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन की खासियत?
हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग होते हैं। इनकी खासियत उड़ान के दौरान दिशा बदलने और कम ऊंचाई पर तेज गति से आगे बढ़ने की क्षमता है। इन खूबियों के कारण उड़ान के रास्ते का अनुमान लगाना और इन्हें रोकना अधिक मुश्किल हो सकता है। दक्षिण कोरिया इस तकनीक को अपनी 'किल चेन' और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। किल चेन उसकी ऐसी रक्षा रणनीति है, जिसके तहत खतरे की पहचान कर संभावित हमले से पहले कार्रवाई करने की क्षमता विकसित की जाती है।
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आगे क्या है दक्षिण कोरिया की योजना?
पहला सफल परीक्षण होने के बाद दक्षिण कोरिया इस तकनीक को और विकसित करने और जल्द तैनात करने की योजना बना रहा है। हालांकि, सफल परीक्षण के बावजूद इस हथियार को पूरी तरह परिचालन क्षमता तक पहुंचाने में समय लग सकता है। इस परीक्षण से दक्षिण कोरिया की स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने की कोशिशों को बढ़ावा मिला है। वहीं, क्षेत्र में हाइपरसोनिक मिसाइलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सैन्य विकास के साथ कूटनीतिक प्रयास भी क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए अहम होंगे।




















