sakti:बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना तो तहसील में भूख हड़ताल पर बैठा पूरा परिवार,3 साल से कट रहे दफ्तरों के चक्कर

प्रेम कुमार,रायपुर: सक्ती जिले के भोंथिया तहसील कार्यालय में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर एक परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया है। परिवार का आरोप है कि करीब तीन साल से आवेदन और शिकायत के बावजूद दो बच्चों का जन्म पंजीयन और प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। परेशान परिवार अब तहसील कार्यालय परिसर में कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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3 साल से प्रमाण पत्र का इंतजार
आमापाली गांव निवासी संतोष कुमार पटेल का कहना है कि उनके दो बच्चों गुड़वनत्तिन पटेल और दुर्गा पटेल के जन्म पंजीयन के लिए ग्राम पंचायत में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया गया था। परिवार के मुताबिक, लगातार प्रयास के बाद भी दोनों बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए।

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जन्म प्रमाण पत्र नहीं, बच्चों की पढ़ाई और आधार पर असर
परिवार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण बच्चों के आधार कार्ड बनवाने, स्कूल में दाखिला कराने और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। परिवार ने इसे बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
संतोष पटेल के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र के मामले को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत की गई थी। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। परिवार का आरोप है कि बार-बार आवेदन और शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

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पत्नी और बच्चों के साथ भूख हड़ताल
समस्या का समाधान नहीं होने से संतोष कुमार पटेल अपनी पत्नी नेहा पटेल, परिवार के अन्य सदस्यों और बच्चों के साथ तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोनों बच्चों का जन्म पंजीयन और प्रमाण पत्र जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
परिवार की मांग है कि दोनों बच्चों का जन्म पंजीयन तत्काल कराया जाए और जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए। साथ ही मामले में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
परिवार के तहसील परिसर में भूख हड़ताल पर बैठने के बाद अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर है। तहसीलदार सिद्धार्थ आनंद और ग्राम सरपंच का पक्ष भी मामले में महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र का यह मामला कब तक सुलझता है।












