RTO के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के साथी चेतन को हाईकोर्ट से मानवीय आधार पर मिली अस्थाई जमानत

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में आरोपी चेतन सिंह गौड़ को मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह राहत उसकी गंभीर रूप से बीमार पत्नी और असमय जन्मे जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए दी है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया है।
पत्नी और दोनों नवजात अस्पताल में भर्ती
अदालत में बचाव पक्ष ने बताया कि चेतन सिंह गौड़ का विवाह 2012 में हुआ था, लेकिन लंबे समय तक चिकित्सीय समस्याओं के कारण संतान सुख नहीं मिल सका। हैदराबाद में IVF के दो कठिन उपचार के बाद 14 जून 2025 को पत्नी ने समय से पहले जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को जन्म दिया।
वर्तमान में दोनों नवजात NICU में भर्ती हैं, जबकि पत्नी की स्थिति भी गंभीर है और वह ऑपरेशन से गुजर रही हैं। ऐसे में आरोपी ही एकमात्र व्यक्ति है जो उनकी देखभाल कर सकता है।
ED ने किया विरोध, लेकिन मानी परिस्थितियां
प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने अंतरिम जमानत का विरोध किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि आरोपी की पत्नी और नवजात बच्चे अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी देखभाल के लिए आरोपी की मौजूदगी जरूरी है।
27 अगस्त तक जमानत, 28 को करना होगा सरेंडर
अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी की उपस्थिति परिवार के लिए अनिवार्य है। मामले के गुण-दोष में गए बिना, केवल मानवीय आधार पर चेतन सिंह गौड़ को अस्थायी जमानत दी जाती है।
जमानत 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर मिलेगी। यह आदेश प्रमाणित प्रति मिलने के बाद से प्रभावी होगा और 27 अगस्त 2025 तक लागू रहेगा। 28 अगस्त 2025 को आरोपी को संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा, अन्यथा गिरफ्तारी हो सकती है।












