Hemant Nagle
10 Jan 2026
ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शहर में अवैध निर्माण के एक मामले की सुनवाई के दौरान ग्वालियर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि नगर निगम अपने कानूनी दायित्वों को सही तरीके से नहीं निभाएगा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा हादसे का उदाहरण दिया, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह हादसा दर्शाता है कि अवैध निर्माण को समय पर रोका न गया तो बड़ी त्रासदी हो सकती है।
हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम के आयुक्त से कहा कि इंदौर की त्रासदी से सबक लें और शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ शून्य सहनशीलता अपनाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर नगर निगम समय पर कार्रवाई नहीं करेगा, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।
मामला दो दुकानदारों, निहाल चंद और गोपाल चंद के बीच अवैध निर्माण को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। दीवारें हटाकर 8 दुकानों को 5 में बदल दिया गया था और दुकानों के बाहर टीनशेड का अवैध निर्माण किया गया था।
पहले यह मामला जिला न्यायालय में गया, जहां छठवें अपर जिला न्यायाधीश ने दुकानों के बाहर किए गए निर्माण को हटाने और आंतरिक दीवारों का पुनर्निर्माण कराने के आदेश दिए। इसके बाद निहाल चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि दुकानों के बाहर बिना अनुमति बनाए गए ढांचे को 15 दिनों के अंदर हटाया जाए। अगर तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो नगर निगम खुद 16वें दिन कार्रवाई करेगा और खर्च संबंधित दुकानदारों से वसूला जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग परमिशन सिर्फ औपचारिकता नहीं है। अनुमति देते समय एफएआर, भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान जैसे सभी नियमों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर निर्माण करता है, तो उसे हटवाना नगर निगम की कानूनी जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ग्वालियर नगर निगम ने अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिसके कारण शहर में अवैध निर्माण बढ़ते रहे।