इंदौर की त्रासदी से सबक लो...ग्वालियर HC की नगर निगम को सख्त चेतावनी, कहा- 15 दिन में हटाएं अवैध ढांचे

ग्वालियर हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। कोर्ट ने अवैध निर्माण पर शून्य सहनशीलता अपनाने और 15 दिनों में ढांचे हटाने का निर्देश दिया। इंदौर हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई न होने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बिल्डिंग परमिशन नियमों का पालन अनिवार्य है।
Follow on Google News
ग्वालियर HC की नगर निगम को सख्त चेतावनी, कहा- 15 दिन में हटाएं अवैध ढांचे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शहर में अवैध निर्माण के एक मामले की सुनवाई के दौरान ग्वालियर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि नगर निगम अपने कानूनी दायित्वों को सही तरीके से नहीं निभाएगा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

    इंदौर हादसे से लिया उदाहरण

    कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा हादसे का उदाहरण दिया, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह हादसा दर्शाता है कि अवैध निर्माण को समय पर रोका न गया तो बड़ी त्रासदी हो सकती है।

    आयुक्त को चेतावनी और शून्य सहनशीलता का निर्देश

    हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम के आयुक्त से कहा कि इंदौर की त्रासदी से सबक लें और शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ शून्य सहनशीलता अपनाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर नगर निगम समय पर कार्रवाई नहीं करेगा, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

    विवाद दो दुकानदारों के बीच

    मामला दो दुकानदारों, निहाल चंद और गोपाल चंद के बीच अवैध निर्माण को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। दीवारें हटाकर 8 दुकानों को 5 में बदल दिया गया था और दुकानों के बाहर टीनशेड का अवैध निर्माण किया गया था।

    जिला न्यायालय के आदेश और हाईकोर्ट में याचिका

    पहले यह मामला जिला न्यायालय में गया, जहां छठवें अपर जिला न्यायाधीश ने दुकानों के बाहर किए गए निर्माण को हटाने और आंतरिक दीवारों का पुनर्निर्माण कराने के आदेश दिए। इसके बाद निहाल चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    15 दिन में अवैध ढांचा हटाने के निर्देश

    हाईकोर्ट ने कहा कि दुकानों के बाहर बिना अनुमति बनाए गए ढांचे को 15 दिनों के अंदर हटाया जाए। अगर तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो नगर निगम खुद 16वें दिन कार्रवाई करेगा और खर्च संबंधित दुकानदारों से वसूला जाएगा।

    बिल्डिंग परमिशन कोई औपचारिकता नहीं

    कोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग परमिशन सिर्फ औपचारिकता नहीं है। अनुमति देते समय एफएआर, भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान जैसे सभी नियमों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर निर्माण करता है, तो उसे हटवाना नगर निगम की कानूनी जिम्मेदारी है।

    नगर निगम की जिम्मेदारी पर टिप्पणी

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ग्वालियर नगर निगम ने अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिसके कारण शहर में अवैध निर्माण बढ़ते रहे।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts