Aakash Waghmare
10 Jan 2026
Manisha Dhanwani
9 Jan 2026
Manisha Dhanwani
9 Jan 2026
तेहरान। ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन अब सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल चुका है। बीते दो हफ्तों से देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनियों और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के तीखे बयानों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि, अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो हम दखल देंगे। हम वहां हमला करेंगे, जहां सबसे ज्यादा दर्द होगा।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि, इसका मतलब जमीनी सैन्य कार्रवाई नहीं है, लेकिन अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा जो ईरान के लिए बेहद नुकसानदेह होंगे। उन्होंने कहा कि ईरान बहुत बड़ी मुसीबत में है और हालात पर अमेरिका करीबी नजर बनाए हुए है।
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि, प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद किया जाए। उन्होंने कहा, बेहतर होगा कि आप गोलीबारी शुरू न करें, क्योंकि अगर आपने गोली चलाई, तो हम भी गोली चलाएंगे। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए ईरान को इस समय बेहद खतरनाक जगह बताया।
प्रदर्शनों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई टीवी पर सामने आए। उन्होंने आंदोलन के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। खामेनेई ने कहा कि, प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने ट्रंप को तानाशाह बताते हुए दावा किया कि इतिहास में घमंड में डूबे शासकों का पतन तय रहा है।
ईरान में बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब सीधे मौजूदा शासन को चुनौती देने लगे हैं। हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही खत्म करो’ जैसे नारे लगा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, मूर्तियां गिराईं और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस्फहान में सरकारी टीवी दफ्तर में आग लगाने और तेहरान की अल-रसूल मस्जिद को नुकसान पहुंचाने की खबरें भी आई हैं।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट्स में आरोप है कि, सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों पर गोली चला रहे हैं, जबकि सरकारी मीडिया उन्हें ‘आतंकी’ और ‘तोड़फोड़ करने वाला’ बताकर सख्त कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है।
यह भी पढ़ें: ईरान में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन : 45 की मौत; इंटरनेट-फोन बंद, ट्रंप की चेतावनी के बाद अलर्ट पर सेना
प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान सरकार ने देशव्यापी इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे गंभीर उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि, इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है।
नीति अनुसंधान संस्थानों के अनुसार, 7 जनवरी के बाद से विरोध प्रदर्शनों की संख्या और तीव्रता में भारी इजाफा हुआ है। हालात काबू में करने के लिए ईरानी शासन को कुछ प्रांतों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ग्राउंड फोर्सेज उतारनी पड़ी हैं, जिसे बेहद असाधारण कदम माना जा रहा है।
भारत ने भी ईरान में हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में करीब 10,000 भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये प्रदर्शन 2022-23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों से भी बड़े माने जा रहे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरानी सत्ता के लिए इसे सबसे गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: Donald Trump Warned: ईरान ने परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया तो एक और हमले के लिए तैयार रहे