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ईरान में आजादी की मांग पर मौत!खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर करवाई फायरिंग, दावा- तेहरान में अब तक 217 लोगों की मौत

ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। तेहरान के छह अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत का दावा किया गया है। सुरक्षाबलों पर गोलीबारी के आरोप हैं, जबकि सरकार ने इंटरनेट बंद कर सख्ती बढ़ा दी है। खामेनेई ने झुकने से इनकार किया है और ट्रंप की चेतावनी से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर करवाई फायरिंग, दावा- तेहरान में अब तक 217 लोगों की मौत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    तेहरान। ईरान की राजधानी तेहरान समेत पूरे देश में इस्लामी शासन के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों द्वारा गोलीबारी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक स्थानीय डॉक्टर के हवाले से दावा किया गया है कि, तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।

    गोलीबारी में युवाओं की सबसे ज्यादा मौत

    मीडिया से बातचीत में एक ईरानी डॉक्टर ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि, मृतकों में अधिकांश युवा हैं और ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई। डॉक्टर के अनुसार, उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षाबलों ने मशीनगन से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस एक घटना में ही कम से कम 30 लोगों को गोली लगने का दावा किया गया है।

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    217 मौतों के दावे पर सवाल

    जहां डॉक्टर ने 217 मौतों का दावा किया है, वहीं वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने अब तक कम से कम 63 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें 49 नागरिक बताए गए हैं। ईरान में मीडिया पर सरकारी नियंत्रण, विदेशी पत्रकारों पर पाबंदी और इंटरनेट बंदी के चलते मौतों के आंकड़ों को लेकर भारी असमंजस बना हुआ है।

    इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद

    प्रदर्शन तेज होते ही ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन कनेक्शन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं। माना जा रहा है कि, इससे वास्तविक हालात और मौतों के आंकड़े सामने आने से रोके जा रहे हैं। यही वजह है कि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

    यह भी पढ़ें: ईरान को ट्रंप की खुली धमकी : कहा- ‘जहां सबसे ज्यादा दर्द होगा, वहीं वार करेंगे’, ऐसा क्यों बोले अमेरिकी राष्ट्रपति

    28 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन

    ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को महंगाई, गिरती मुद्रा और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन अब यह आंदोलन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारी सड़कों पर आजादी और तानाशाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाते हुए इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं।

    अल-रसूल मस्जिद में आग

    हालांकि अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इसके अलावा कई सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाने की खबरें भी आई हैं।

    खामेनेई बोले- उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा ईरान

    ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि, इस्लामिक रिपब्लिक किसी भी सूरत में उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि, आंदोलन को दबाने के लिए सख्ती और बढ़ाई जा सकती है।

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    प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा?

    तेहरान के सरकारी वकील (प्रॉसिक्यूटर) ने चेतावनी दी है कि, प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक दी जा सकती है। वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने अभिभावकों से अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि, अगर गोली लगती है तो शिकायत न करें।

    ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि, अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरान-अमेरिका तनाव और गहराता नजर आ रहा है।

    आर्थिक संकट बना विरोध की जड़

    ईरान में बढ़ती महंगाई, ईरानी रियाल का डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना, पानी की कमी और बिजली कटौती ने आम जनता का गुस्सा भड़का दिया है। यही आर्थिक बदहाली अब इस्लामी शासन के खिलाफ बड़े जनविद्रोह में बदलती दिख रही है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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