तेहरान। ईरान की राजधानी तेहरान समेत पूरे देश में इस्लामी शासन के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों द्वारा गोलीबारी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक स्थानीय डॉक्टर के हवाले से दावा किया गया है कि, तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
मीडिया से बातचीत में एक ईरानी डॉक्टर ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि, मृतकों में अधिकांश युवा हैं और ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई। डॉक्टर के अनुसार, उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षाबलों ने मशीनगन से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस एक घटना में ही कम से कम 30 लोगों को गोली लगने का दावा किया गया है।

जहां डॉक्टर ने 217 मौतों का दावा किया है, वहीं वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने अब तक कम से कम 63 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें 49 नागरिक बताए गए हैं। ईरान में मीडिया पर सरकारी नियंत्रण, विदेशी पत्रकारों पर पाबंदी और इंटरनेट बंदी के चलते मौतों के आंकड़ों को लेकर भारी असमंजस बना हुआ है।
प्रदर्शन तेज होते ही ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन कनेक्शन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं। माना जा रहा है कि, इससे वास्तविक हालात और मौतों के आंकड़े सामने आने से रोके जा रहे हैं। यही वजह है कि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
यह भी पढ़ें: ईरान को ट्रंप की खुली धमकी : कहा- ‘जहां सबसे ज्यादा दर्द होगा, वहीं वार करेंगे’, ऐसा क्यों बोले अमेरिकी राष्ट्रपति
ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को महंगाई, गिरती मुद्रा और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन अब यह आंदोलन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारी सड़कों पर आजादी और तानाशाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाते हुए इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इसके अलावा कई सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाने की खबरें भी आई हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि, इस्लामिक रिपब्लिक किसी भी सूरत में उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि, आंदोलन को दबाने के लिए सख्ती और बढ़ाई जा सकती है।
यह भी पढ़ें: ईरान में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन : 45 की मौत; इंटरनेट-फोन बंद, ट्रंप की चेतावनी के बाद अलर्ट पर सेना
तेहरान के सरकारी वकील (प्रॉसिक्यूटर) ने चेतावनी दी है कि, प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक दी जा सकती है। वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने अभिभावकों से अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि, अगर गोली लगती है तो शिकायत न करें।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि, अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरान-अमेरिका तनाव और गहराता नजर आ रहा है।
ईरान में बढ़ती महंगाई, ईरानी रियाल का डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना, पानी की कमी और बिजली कटौती ने आम जनता का गुस्सा भड़का दिया है। यही आर्थिक बदहाली अब इस्लामी शासन के खिलाफ बड़े जनविद्रोह में बदलती दिख रही है।
यह भी पढ़ें: Donald Trump Warned: ईरान ने परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया तो एक और हमले के लिए तैयार रहे