Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
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15 Jan 2026
Manisha Dhanwani
15 Jan 2026
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15 Jan 2026
कोलकाता। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में सीएम ममत बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई के खिलाफ जमकर धरना दिया। इसी कड़ी में उन्होंने कई भाजपा नेताओं पर कड़े लहजे में ताना कसा है। इसके जवाब में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है।
नोटिस में उन्होंने ममता से 72 घंटे के भीतर अपने आरोपों के ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। सुवेंदु ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में प्रमाण नहीं देने की स्थिति में वे मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। बता दें यह नोटिस मुख्यमंत्री के उस बयान के बाद भेजा गया है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी पर कोयला तस्करी से जुड़े होने का आरोप लगाया था।
आज, CM ममता बनर्जी ने ED की जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश में, मेरे खिलाफ बिल्कुल निराधार मानहानिकारक आरोप लगाए साथ ही और मुझ पर और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ कोयला घोटाले से जोड़ा गया। ये लापरवाह बयान, व्यक्तिगत अपमान से भरे हुए, बिना किसी सबूत के सार्वजनिक रूप से दिए गए। ऐसे निराधार दावों ने न केवल मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल किया है, बल्कि सार्वजनिक चर्चा की गरिमा को भी कम किया है। आज मैंने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है जिसमें उनसे 72 घंटे के भीतर सभी सबूत प्रदान करने की मांग की है। अगर वे ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो मैं मानहानि का केस करूंगा।
दरअसल ममता बनर्जी का दावा है कि कथित कोयला घोटाले से जुड़ा पैसा सुवेंदु अधिकारी के माध्यम से अमित शाह तक पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने ये आरोप 8 जनवरी को कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के विरोध में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए लगाए थे। इस दौरान उन्होंने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था।
इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने ED के खिलाफ दो FIR भी दर्ज कराई हैं और कोलकाता में विरोध मार्च का नेतृत्व किया। जहां मार्च के दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके पास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े अहम सबूत हैं, जिनमें पेन ड्राइव भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में सियासी टकराव और तेज हो गया है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा आमने-सामने नजर आ रही हैं।
विरोध प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में उस समय असामान्य हालात बन गए, जब निर्धारित सुनवाई से पहले ही न्यायाधीश को कोर्ट रूम छोड़ना पड़ा। तृणमूल कांग्रेस ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले ED ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ संवैधानिक पद के दुरुपयोग और कथित तौर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन अपने साथ ले जाने के आरोपों को लेकर 28 पन्नों की याचिका दायर की थी।
इन दोनों याचिकाओं पर सुनवाई 9 जनवरी को दोपहर 2:30 बजे जस्टिस शुभ्रा घोष की पीठ में होनी थी। हालांकि, जज के कोर्ट रूम में प्रवेश करने से पहले ही वहां वकीलों और अन्य लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई।