रायपुर में 160 हाईटेक कैमरों से कचरा फेंकने वालों पर शिकंजा,अब कैमरे बताएंगे कौन फैला रहा गंदगी

रायपुर की सड़कों पर अब गंदगी फैलाना पड़ेगा भारी, 160 हाईटेक कैमरों की नजर से नहीं बच पाएंगे कचरा फैलाने वाले।रायपुर में खुले में कचरा फेंकने वालों पर नगर निगम अब हाईटेक निगरानी से शिकंजा कसने की तैयारी में है। शहर के सभी 10 जोन में करीब 160 नाइट विजन कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे अंधेरे में करीब 50 मीटर तक रिकॉर्डिंग कर सकेंगे। सड़क किनारे कचरा फेंकने वालों के साथ कचरा वाहनों की भी निगरानी होगी।
रायपुर में 160 हाईटेक कैमरों से कचरा फेंकने वालों पर शिकंजा,अब कैमरे बताएंगे कौन फैला रहा गंदगी

रायपुर: राजधानी रायपुर में सार्वजनिक जगहों और सड़कों पर कचरा फेंकने वालों की अब खैर नहीं। नगर निगम शहर के सभी 10 जोन में करीब 160 हाईटेक नाइट विजन कैमरे लगाने जा रहा है। कैमरों की मदद से सड़क किनारे कचरा फेंकने, वाहन से कचरा उतारने और खुले में कचरा डालने वालों की पहचान की जाएगी। इतना ही नहीं, कचरा कलेक्शन करने वाले वाहनों की आवाजाही और कचरा कहां से उठाया गया, इसकी भी निगरानी होगी। यानी अब रायपुर में गंदगी फैलाने वालों पर निगम की सीधी डिजिटल नजर रहेगी।

10 जोन में 160 कैमरों का ‘निगरानी नेटवर्क’

नगर निगम की नई व्यवस्था के तहत रायपुर के सभी 10 जोन में करीब 160 हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। कैमरों को शहर के उन स्थानों पर लगाया जाएगा, जहां खुले में कचरा फेंकने की शिकायतें ज्यादा सामने आती हैं। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर कचरा फेंकने वाले व्यक्ति या वाहन की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

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अंधेरा भी नहीं बनेगा बहाना, 50 मीटर तक नजर

नए कैमरों में नाइट विजन तकनीक होगी। अंधेरे में भी करीब 50 मीटर तक की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकेगा। स्ट्रीट लाइट की रोशनी मिलने पर निगरानी क्षमता और बेहतर हो जाएगी। यानी रात के अंधेरे में चोरी-छिपे कचरा डालने वालों के लिए भी बच निकलना आसान नहीं होगा।

सिर्फ लोगों पर नहीं, कचरा वाहनों पर भी नजर

निगम की निगरानी व्यवस्था केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहेगी। कचरा कलेक्शन करने वाले वाहनों की भी डिजिटल निगरानी की जाएगी। वाहनों के नंबर रिकॉर्ड किए जाएंगे। इससे यह ट्रैक करने में मदद मिलेगी कि कचरा किस इलाके से उठाया गया और उसे निर्धारित जगह पर पहुंचाया गया या नहीं।

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मोबाइल ऐप से 24 घंटे मॉनिटरिंग

कैमरों को मोबाइल ऐप आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। इसके जरिए जोन कमिश्नर और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी कैमरों की लाइव निगरानी कर सकेंगे।निगम की योजना कमांड सेंटर के जरिए कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो को मॉनिटर करने की भी है। किसी घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग को कार्रवाई के लिए साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

23 संवेदनशील जगहों पर सबसे पहले कैमरे

निगम ने पुलिस के साथ मिलकर शहर की करीब 23 संवेदनशील जगहों को चिह्नित किया है। इनमें व्यावसायिक और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। इन स्थानों पर कैमरे लगाने का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार अन्य स्थानों को भी निगरानी नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है।

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सबूत नहीं मिला’ वाली दिक्कत होगी खत्म?

नगर निगम के अनुसार खुले में कचरा फेंकने के कई मामलों में कार्रवाई इसलिए मुश्किल हो जाती है क्योंकि घटना का पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं होता। नई कैमरा व्यवस्था में घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने से व्यक्ति या वाहन की पहचान और कार्रवाई के लिए जरूरी साक्ष्य जुटाना आसान हो सकता है।

तीन साल तक कंपनी संभालेगी कैमरों की जिम्मेदारी

कैमरों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी को तीन साल तक दी जाएगी। इसके लिए 15वें वित्त आयोग से स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था के लिए मिले फंड का इस्तेमाल किया जाएगा।

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रोज 750 टन कचरा, फिर भी सड़क किनारे गंदगी

रायपुर शहर से रोजाना करीब 750 टन कचरा प्रोसेसिंग प्लांट भेजा जाता है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर खुले में कचरा फेंकने की समस्या बनी हुई है। नगर निगम को उम्मीद है कि हाईटेक कैमरों की निगरानी व्यवस्था से खुले में कचरा डालने की घटनाओं पर लगाम लगेगी और शहर की सफाई व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

अब रायपुर में ‘कचरा फेंको और निकल जाओ’ वाला खेल नहीं!

160 हाईटेक कैमरों का यह नेटवर्क रायपुर की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर कैमरों की निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सार्वजनिक जगहों पर कचरा फैलाने वालों की पहचान करना पहले के मुकाबले आसान होगा।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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