Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

अवैध पेस्टीसाइड दुकानों के कारोबार पर सवाल, गलत दवा से धान की फसल खराब होने का आरोप

सोहागपुर में खरपतवार नाशक दवा के छिड़काव से धान की फसल खराब होने का मामला सामने आया है। किसानों ने अनाधिकृत पेस्टीसाइड दुकानों और गलत दवा की सलाह पर सवाल उठाते हुए दुकानों की जांच और दवाओं के नमूनों की वैज्ञानिक जांच की मांग की है। 
अवैध पेस्टीसाइड दुकानों के कारोबार पर सवाल, गलत दवा से धान की फसल खराब होने का आरोप

सोहागपुर। विकासखंड के बड़े क्षेत्र में खरपतवार नाशक दवा के छिड़काव के बाद धान की फसल खराब होने का मामला सामने आने के बाद पेस्टीसाइड की बिक्री व्यवस्था सवालों के घेरे में है। किसानों का आरोप है कि नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में ऐसी पेस्टीसाइड दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां संचालकों के पास निर्धारित योग्यता और दवाओं के तकनीकी इस्तेमाल की पर्याप्त जानकारी नहीं है। किसानों के मुताबिक विभिन्न कंपनियों की पेस्टीसाइड दवाएं अधिकृत विक्रेताओं के अलावा कथित तौर पर अनाधिकृत रूप से भी बेची जा रही हैं। आरोप है कि दवाओं के रासायनिक प्रभाव, फसल के अनुसार उपयोग, सही मात्रा और छिड़काव की तकनीक की जानकारी नहीं होने के कारण किसानों को गलत सलाह मिल रही है। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है और कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

'विल सुपर' के इस्तेमाल से फसल खराब होने का आरोप

धान की फसल को हुए नुकसान के मामले में विलवुड कंपनी की 'विल सुपर' नामक खरपतवार नाशक दवा के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस दवा के छिड़काव के बाद बड़े रकबे में धान की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, इस मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि यह दवा लंबे समय से बाजार में उपलब्ध है और किसान इसका इस्तेमाल करते आ रहे हैं, तो इस वर्ष अचानक बड़े पैमाने पर फसल नुकसान की वजह क्या है। कृषि जानकारों के मुताबिक किसी भी खरपतवार नाशक का इस्तेमाल फसल, उसकी अवस्था, मात्रा और मौसम जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। गलत दवा या निर्धारित मात्रा से ज्यादा इस्तेमाल फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।

सैकड़ों दुकानों की जांच की मांग

किसानों का कहना है कि सोहागपुर क्षेत्र में नगर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में पेस्टीसाइड की दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें से कुछ दुकानों के संचालकों की योग्यता और तकनीकी जानकारी को लेकर किसानों ने सवाल उठाए हैं। उन्नत किसानों के मुताबिक खरपतवार नाशक, कीटनाशक और फसल टॉनिक का इस्तेमाल अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाता है। हर फसल के लिए दवा की मात्रा और छिड़काव का समय भी अलग हो सकता है। ऐसे में यदि विक्रेता द्वारा बिना पर्याप्त जानकारी के दवा की सलाह दी जाती है तो किसान को पूरी फसल गंवाने तक की नौबत आ सकती है।

Breaking News

कृषि विभाग की भूमिका पर भी सवाल

फसल नुकसान के मामले के बाद किसानों ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ अनाधिकृत विक्रेताओं द्वारा लंबे समय से पेस्टीसाइड की बिक्री किए जाने की शिकायतें हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। किसानों ने मांग की है कि क्षेत्र में संचालित सभी पेस्टीसाइड दुकानों की जांच कर संचालकों की योग्यता और लाइसेंस की जानकारी जुटाई जाए। इसके साथ ही दुकानों के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर और उपलब्ध दवाओं की भी जांच की जाए।

सीहोर: शराब दुकान में लाखों की चोरी, टीन उखाड़कर घुसे बदमाश; जांच में जुटी पुलिस

दवाओं के नमूनों की जांच की मांग

क्षेत्र के उन्नत कृषक चौहान सिंह पटेल का कहना है कि कई बार पेस्टीसाइड विक्रेताओं द्वारा किसानों को फसल के अनुसार गलत दवा इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। उनका आरोप है कि ऐसी सलाह के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों ने मांग की है कि जिन दवाओं के इस्तेमाल के बाद धान की फसल खराब होने की शिकायत सामने आई है, उनके नमूने लेकर वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। साथ ही प्रभावित खेतों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि फसल नुकसान की वास्तविक वजह दवा की गुणवत्ता, गलत मात्रा, गलत फसल में इस्तेमाल या छिड़काव की तकनीक में हुई चूक में से क्या है। किसानों का कहना है कि जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी और प्रभावित किसानों को उचित राहत मिल सकेगी।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

Latest Posts