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छग में चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिए 40 नेताओं पर गिरी गाज,3 साल तक नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

छग में चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने पर 40 पूर्व प्रत्याशी 3 साल के लिए अयोग्य घोषित। भारत निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10A के तहत इन उम्मीदवारों को तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया है। हालिया कार्रवाई में सरायपाली के अजीत डोलचंद चौहान, महासमुंद के अशोक कश्यप, चंचल वाणी और बृजलाल ठाकुर के नाम शामिल हैं। इससे पहले 36 उम्मीदवारों पर कार्रवाई हो चुकी थी।
छग में चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिए 40 नेताओं पर गिरी गाज,3 साल तक नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन सामने आया है। विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद निर्वाचन व्यय का हिसाब जमा नहीं करना 40 पूर्व प्रत्याशियों को भारी पड़ गया। भारत निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत इन उम्मीदवारों को तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया है।

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चुनाव लड़ा, खर्च का हिसाब नहीं दिया,अब 3 साल का प्रतिबंध

निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के 40 पूर्व प्रत्याशी अब अगले तीन वर्षों तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इनमें 36 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, जबकि हालिया आदेश में चार और नाम जुड़ गए हैं। आयोग के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित समयसीमा में निर्वाचन व्यय का लेखा-जोखा जमा करना हर उम्मीदवार के लिए जरूरी है। नियमों का पालन नहीं करने पर धारा 10A के तहत अयोग्यता की कार्रवाई की जा सकती है।

चार नए नामों पर भी आयोग का शिकंजा

हालिया आदेश में वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने वाले चार उम्मीदवारों को तीन साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इनमें सरायपाली से अजीत डोलचंद चौहान, महासमुंद से अशोक कश्यप, चंचल वाणी और बृजलाल ठाकुर शामिल हैं। इन चार नामों के जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ में चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने के कारण अयोग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों की संख्या 40 हो गई है।

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30 दिन में देना होता है चुनाव खर्च का पूरा हिसाब

चुनावी नियमों के मुताबिक प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित अवधि में अपने निर्वाचन व्यय का पूरा और सही विवरण जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। खर्च का हिसाब तय समय में जमा नहीं करने या देरी के लिए संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में निर्वाचन आयोग कार्रवाई कर सकता है। इसी प्रावधान के तहत इन उम्मीदवारों पर तीन साल की अयोग्यता लागू की गई है।

तीन साल तक कौन-कौन से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे?

निर्वाचन आयोग की इस अयोग्यता का सीधा असर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की पात्रता पर पड़ेगा। प्रतिबंध की अवधि में संबंधित उम्मीदवार इन दोनों स्तरों के चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हालांकि, यह अयोग्यता पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों पर स्वतः लागू नहीं होती। यानी स्थानीय चुनावों को लेकर स्थिति अलग नियमों के तहत निर्धारित हो सकती है।

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क्या अयोग्यता कम भी हो सकती है?

निर्वाचन आयोग के पास संबंधित मामलों में अयोग्यता की अवधि को कम करने अथवा अयोग्यता हटाने का अधिकार भी रहता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित उम्मीदवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आयोग के समक्ष राहत की मांग करनी होगी।

देश में छत्तीसगढ़ का चौथा स्थान

चुनावी खर्च का लेखा-जोखा जमा नहीं करने के मामलों में छत्तीसगढ़ की स्थिति भी अब चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देशभर में कुल 529 उम्मीदवारों को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। इनमें छत्तीसगढ़ के 40 उम्मीदवार शामिल हैं।

चुनावी मैदान से बाहर हुए 40 चेहरे

छत्तीसगढ़ में निर्वाचन व्यय का हिसाब नहीं देने के मामले में कार्रवाई का आंकड़ा अब 40 तक पहुंच गया है। इनमें 36 पुराने मामले और हालिया आदेश में अयोग्य घोषित किए गए चार नए उम्मीदवार शामिल हैं।

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फैक्ट फाइल

छत्तीसगढ़ में अयोग्य उम्मीदवार: 40

पुराने अयोग्य उम्मीदवार: 36

हालिया कार्रवाई: 4 उम्मीदवार

देशभर में कुल अयोग्य उम्मीदवार: 529

अयोग्यता की अवधि: 3 वर्ष

मुख्य प्रभाव: लोकसभा और विधानसभा चुनाव

कानूनी आधार: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A नए नाम: अजीत डोलचंद चौहान, अशोक कश्यप, चंचल वाणी और बृजलाल ठाकुर ने चुनावी खर्च का हिसाब-किताब महज औपचारिकता नहीं है। नियमों की अनदेखी अब सीधे चुनाव लड़ने की पात्रता पर भारी पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में 40 उम्मीदवारों पर हुई कार्रवाई इसका बड़ा उदाहरण है।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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