राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम संबोधन, कहा- तेजी से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था

राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ ही घंटों बाद भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत का साक्षी बनेगा और देश-विदेश में भारतीय इस पर्व को उत्साह से मनाएंगे। उन्होंने तिरंगे को स्वतंत्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे हर भारतीय गर्व के साथ फहराता है। राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को नमन करते हुए महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और सरदार पटेल के योगदान को याद किया। उन्होंने विभाजन की विभीषिका, रियासतों के भारत में विलय और लोकतंत्र में जनभागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने समावेशी विकास किया है और 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर लाने में सफलता मिली है।
तिरंगे के साथ शुरू होगा आजादी के 80वें वर्ष का सफर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देकर की। उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों बाद देश की आजादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत होगी। देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीय इस राष्ट्रीय पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा तिरंगा हमारी आजादी का प्रतीक है और हम इसे बहुत गर्व के साथ फहराते हैं। आजादी का वास्तविक अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिकों को अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के लिए अवसर मिलें और वे भारत को दुनिया का सबसे आगे का देश बनाने के लक्ष्य में योगदान कर सकें।
'15 अगस्त 1947 भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुईं'
राष्ट्रपति ने 15 अगस्त 1947 को याद करते हुए कहा कि उस दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुईं और स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता सभी देशवासी बने। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों और किसानों सहित राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले सभी नागरिकों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिक राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए स्वतंत्रता संग्राम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के समाज सुधार और राष्ट्र-निष्ठा के आदर्शों को याद किया। भारत की महान संतानों के आदर्शों पर चलते हुए देश स्वतंत्र हुआ और आगे बढ़ रहा है।
'14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रुप में मनाते हैं'
राष्ट्रपति ने कहा कि 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और उन्हें बंटवारे की विभीषिका सहनी पड़ी, फिर भी उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत से जोड़ना भी बड़ी चुनौती थी। राष्ट्रपति ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राजशाही व्यवस्थाओं को समाप्त कर रियासतों का स्वतंत्र लोकतंत्र में विलय कराया। लोकतंत्र की जननी भारतभूमि के लोगों में जनभागीदारी की भावना पहले से रही है और देशवासी इसे नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
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'हर व्यक्ति बड़े सपने देख और पूरा कर सकता है'
राष्ट्रपति ने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग अनेक क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे उनका विश्वास और मजबूत होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। कार्यपालिका का दायित्व है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे। न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि कमी के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है और विरासत, विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है।
महात्मा फुले और सावित्रीबाई के योगदान को याद किया
राष्ट्रपति ने कहा कि देशवासी महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहे हैं। उन्होंने महात्मा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान को याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि उनके आदर्शों के अनुसार वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है। 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था कर उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
'विरासत और विकास के साथ आगे बढ़ रहा भारत'
राष्ट्रपति ने कहा कि आज देश में यह चेतना मजबूत हो रही है कि सांस्कृतिक गौरव का भाव देश की संप्रभुता को आत्मिक शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वेद-वाक्य ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमें राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक मूल्यों, जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि विरासत और विकास के समन्वय के साथ भारत आगे बढ़ रहा है और हर नागरिक की भागीदारी इस यात्रा को मजबूत बनाती है।












