जम्मू कश्मीर: विधायकों का वेतन नहीं बढ़ेगा, विधानसभा ने विधेयक लिए वापस

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में विधायकों और मंत्रियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़े पांच विधेयक पेश किए थे। इनमें पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था। उमर ने कहा कि जिस हाउस कमेटी ने बढ़ोतरी की सिफारिश की थी, उसमें कोई असहमति वाला नोट नहीं था। उन्होंने BJP सदस्यों पर सैलरी और अलाउंस का समर्थन करने के साथ दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं का हवाला देकर मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश का आरोप लगाया।
बीजेपी के एतराज के बाद बिल वापस
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विधायकों और मंत्रियों की सैलरी और अलाउंस बढ़ाने वाले बिल पर BJP विधायकों ने एतराज जताया। इसके बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, मैं कभी इसके पक्ष में नहीं था। अगर एक भी सदस्य विरोध करता है, तो यह कभी पास नहीं होगा। मैं बिल वापस लेता हूं। इसके बाद सदन ने बहुमत से कानून वापस लेने के पक्ष में वोट किया।
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5 विधेयकों में वेतन और पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए थे। इनमें विधायकों और मंत्रियों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी के साथ पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का भी प्रस्ताव था। अगर बढ़ोतरी होती तो विधायकों की मौजूदा कुल सैलरी 1.8 लाख रुपए से बढ़कर 3 लाख रुपए प्रतिमाह हो सकती थी, लेकिन बिल वापस लिए जाने के बाद ऐसा नहीं हो सका।
उमर बोले-कमेटी में नहीं था असहमति वाला नोट
मुख्यमंत्री ने बिल पर BJP के एतराज का जवाब देते हुए कहा कि जिस हाउस कमेटी ने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश की थी, उसमें कोई असहमति वाला नोट नहीं था। उन्होंने कहा कि BJP सदस्य सैलरी और अलाउंस चाहते थे, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं का हवाला देकर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश भी कर रहे थे।
कानून और संसदीय मामलों का मंत्रालय भी उमर के पास
इस मामले में उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी इसलिए भी अहम है, क्योंकि कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय भी उनके पास हैं। उन्होंने ही जम्मू-कश्मीर के मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1956 में संशोधन से जुड़ा विधेयक विधानसभा में पेश किया था।
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राज्य के दर्जे पर भाजपा को सीएम उमर का जवाब
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा सही समय पर बहाल किए जाने के भाजपा के बार-बार दिए जाने वाले जवाब पर भी तंज किया। पंचायत चुनावों की टाइमलाइन पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, आप राज्य के लिए सही समय कहते हैं, हम पंचायत चुनावों के लिए भी यही कहेंगे। इसी के साथ उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी पंचायत चुनाव कब होंगे, यह पूछती रहेगी तो सरकार भी कह सकती है कि चुनाव सही समय पर होंगे। उमर ने सही समय के मतलब पर भी सवाल उठाया और कहा कि BJP ने यह साफ नहीं किया है कि वह समय कब आएगा या इसे कैसे तय किया जाएगा।




















