PM जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा,जिंदा ग्रामीणों को मृत बताकर निकाले 2-2 लाख रुपये, MP से कबीरधाम तक पहुंची जांच

रायपुर/कवर्धा : प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला अब मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है। कबीरधाम जिले के तीन ग्रामीणों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए दो-दो लाख रुपये का बीमा क्लेम निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से दो ग्रामीण जीवित मिले, जबकि तीसरे के परिजनों के मुताबिक वह रोजगार के सिलसिले में रायपुर गया हुआ है। मामले ने मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंकिंग सत्यापन और बीमा क्लेम की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जिंदा ग्रामीणों के नाम पर बीमा क्लेम, कैसे हुआ पूरा खेल?
कबीरधाम जिले में सामने आए इस मामले में कथित तौर पर ऐसे ग्रामीणों के नाम पर बीमा राशि हासिल की गई, जिन्हें दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया था। जानकारी के अनुसार, दो ग्रामीण अपने घरों में जीवित मिले। वहीं, तीसरे ग्रामीण के परिजनों ने बताया कि वह रोजी-रोटी कमाने के लिए रायपुर गया है। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें अपने नाम पर बीमा कराए जाने और मृत्यु के आधार पर क्लेम निकाले जाने की जानकारी नहीं थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार कराए और बीमा राशि हासिल करने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया?

मध्यप्रदेश के 482 क्लेम जांच के दायरे में
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़े 482 कथित फर्जी बीमा क्लेम जांच के दायरे में हैं। इन मामलों में करीब 9 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि का उल्लेख किया गया है। इसी जांच के दौरान कबीरधाम जिले के तीन ग्रामीणों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, सभी 482 क्लेम की स्थिति, कथित अनियमितताओं की प्रकृति और प्रत्येक मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
भोपाल में दर्ज FIR, दस्तावेजों की पड़ताल जारी
पुलिस संबंधी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भोपाल के थाना अजाक में अपराध क्रमांक 01/26 के तहत कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और बीमा दावों में कथित धोखाधड़ी से जुड़ा मामला दर्ज है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए बीमा कंपनियों से राशि हासिल की गई। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि मृत्यु प्रमाण पत्र कहां से जारी हुए, क्लेम किसने प्रस्तुत किए और बीमा की रकम किन खातों में पहुंची। मामले में अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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मृत्यु प्रमाण पत्र किसने बनाया? सत्यापन व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र: जीवित ग्रामीणों के नाम पर कथित मृत्यु प्रमाण पत्र किसने और किस आधार पर जारी कराए?
बीमा क्लेम: क्लेम के साथ जमा दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई?
बैंक खाते: बीमा की दो-दो लाख रुपये की राशि किन खातों में जमा हुई और उसे किसने निकाला?
पहचान सत्यापन: संबंधित व्यक्तियों की पहचान और मृत्यु की पुष्टि करने वाली प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे नहीं पकड़ी गई?
जिम्मेदारी तय करना: क्या मामला कुछ लोगों तक सीमित है या इसमें अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
क्या है प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना?
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना केंद्र सरकार की जीवन बीमा योजना है। इसके तहत पात्र और बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नियमों एवं शर्तों के अनुसार नामांकित व्यक्ति को दो लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। इस योजना का उद्देश्य परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे में यदि किसी जीवित व्यक्ति को दस्तावेजों में मृत दर्शाकर क्लेम लिया गया है, तो यह गंभीर मामला है। हालांकि, संबंधित ग्रामीणों के नाम पर जारी दस्तावेजों, बीमा पॉलिसी और भुगतान रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि होना आवश्यक है।
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जांच के बाद खुलेगा पूरे नेटवर्क का राज
फिलहाल कबीरधाम के तीन ग्रामीणों के नाम सामने आने से मामले ने छत्तीसगढ़ में भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, क्लेम के दस्तावेज, बैंक खातों और भुगतान की कड़ियों की पड़ताल अहम होगी। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति, बैंक या सरकारी विभाग को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां कथित फर्जी क्लेम के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान कर पाती हैं या नहीं और ग्रामीणों के नाम पर निकाली गई राशि का वास्तविक लाभार्थी कौन है।




















