22 वर्षीय युवक की करंट से मौत, फॉल्ट सुधारने के दौरान हुआ हादसा; जांच में जुटी पुलिस
सीहोर। ग्रामीण जहां काम के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विद्युत कंपनी का दावा है कि संबंधित लाइन परमिट पर बंद थी और हादसा बिजली चोरी के लिए लगाए गए कथित अवैध तार से हुआ। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर युवक करंट की चपेट में कैसे आया?
आंधी में टूटे खंभे, सुधार कार्य के दौरान मातम
ग्राम छापरीकलां में तीन-चार दिन पहले आए तेज आंधी-तूफान और बारिश से बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण शुक्रवार को गणेश मंदिर के पीछे लाइन सुधारने और तार खिंचवाने का काम किया जा रहा था। इसी काम के दौरान एक युवक की मौत से गांव में शोक फैल गया।
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लाइनमैन के साथ जुटे थे सात-आठ युवक
जानकारी के अनुसार, बिजली कंपनी के लाइनमैन के साथ गांव के करीब सात-आठ युवक काम में मदद कर रहे थे। इसी दौरान निखिल मेवाड़ा करंट की चपेट में आ गया। झटका इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अब जांच का अहम पहलू यह है कि काम के दौरान किन सुरक्षा उपायों का पालन किया जा रहा था।
काम के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिजली लाइन के सुधार जैसे जोखिमपूर्ण काम में सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि गैर-तकनीकी युवकों से बिजली लाइन के काम में मदद क्यों ली जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
कंपनी का अलग दावा-अवैध कनेक्शन बना हादसे की वजह
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की अधीक्षण यंत्री पूनम तुमराम ने बताया कि आंधी-तूफान से क्षतिग्रस्त खंभों की मरम्मत के दौरान संबंधित लाइन परमिट पर बंद थी। उनके अनुसार, हादसा कंपनी की इस लाइन में करंट प्रवाहित होने से नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि खेत मालिकों द्वारा 24 घंटे चालू रहने वाली लाइन से नीचे-नीचे अवैध जॉइंट लगाकर बिजली चोरी की जा रही थी और युवक इसी तार के संपर्क में आ गया। विभाग ने घटनास्थल की जांच कराने की बात कही है।
जांच के केंद्र में तीन अहम सवाल
इस मामले में अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि निखिल किस तार के संपर्क में आया, उसमें बिजली कहां से पहुंची और हादसे के समय कार्यस्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। कंपनी के दावे और ग्रामीणों की आशंकाओं की पुष्टि मौके की जांच, संबंधित विद्युत व्यवस्था के परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से ही हो सकेगी। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि काम के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
निखिल मेवाड़ा, पिता तेजसिंह मेवाड़ा, गांव के एक गरीब मजदूर परिवार से था। कम उम्र में बेटे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस मामले की जांच में जुटी
मंडी थाना प्रभारी अर्चना चौहान के अनुसार, पुलिस मामले की जांच कर रही है और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के दायरे में है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, पीड़ित परिवार को सहायता मिले और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।






















