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रीवा: न्यूक्लियर प्लांट के विरोध के बीच आदिवासी महिला की मौत, जल सत्याग्रह कर थी महिला

रीवा के रोझौही गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना के विरोध में पानी में खड़े होकर सत्याग्रह कर रहीं आदिवासी महिला विमला कोल की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद गांव में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
रीवा: न्यूक्लियर प्लांट के विरोध के बीच आदिवासी महिला की मौत, जल सत्याग्रह कर थी महिला
न्यूक्लियर प्लांट के विरोध के बीच आदिवासी महिला की मौत

रीवा। ग्रामीण अपनी पुरखौती जमीन, जंगल और जलस्रोतों को बचाने के लिए विरोध कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि अभी जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ है, केवल प्रारंभिक परीक्षण और तकनीकी जांच की जा रही थी। वहीं, विपक्ष ने इस मामले को आदिवासियों के मूल अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।

जल-जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई में विमला कोल की मौत

रीवा के रोझौही गांव की विमला कोल अपनी पुरखौती जमीन, जंगल और जलस्रोतों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना के विरोध में पानी में खड़े होकर सत्याग्रह के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत से गांव में शोक के साथ आक्रोश भी बढ़ गया है।

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पत्नी की मौत के बाद पति ने बयां किया दर्द

विमला कोल की मौत के बाद उनके पति जमुना कोल ने दुख जताते हुए कहा कि उनकी पत्नी अपनी माटी के हक के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गई। उन्होंने कहा, वह चली गई, अब मेरा क्या बचा है? मैं भी इसी लड़ाई में अपनी जान दे दूंगा, शहीद हो जाऊंगा। तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी और यही उसके संघर्ष को मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

ग्राम सभाओं के विरोध के बावजूद गांव पहुंचीं बोरिंग मशीनें

रोझौही और सरई कला के ग्रामीणों को डर है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, पहचान और आशियाना छिन सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम सभाओं के स्पष्ट इनकार के बावजूद 9 अक्टूबर को बोरिंग मशीनें गांव पहुंचीं, जिसके बाद लोगों ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए विरोध किया। विमला की मौत के बाद ग्रामीणों ने दुख की इस घड़ी में जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर भी नाराजगी जताई।

कलेक्टर बोले-जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ

रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि परियोजना के लिए अभी किसी भी प्रकार की जमीन का औपचारिक अधिग्रहण नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, मौके पर केवल प्रारंभिक परीक्षण और तकनीकी जांच का काम चल रहा था। प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों और मौजूदा स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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विपक्ष ने सरकार से उठाए सवाल

विमला कोल की मौत के बाद विपक्ष ने इस मामले को आदिवासियों के मूल अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि विकास की दौड़ में आखिर कब तक गरीब और आदिवासी परिवारों को जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए अपनी जान गंवानी पड़ेगी। ग्रामीणों के विरोध और प्रशासन के दावों के बीच अब परियोजना को लेकर विवाद और गहरा गया है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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