बांकीपुर में बीजेपी की हार के बाद PM मोदी से मिले नीतीश कुमार,दिल्ली की मुलाकात से तेज हुई सियासी अटकलें

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली अप्रत्याशित हार के बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मंगलवार को हुई इस बैठक में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद रहे। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन समय और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बांकीपुर जैसे बीजेपी के मजबूत गढ़ में हार के बाद यह पहली बड़ी राजनीतिक बैठक है। ऐसे में विपक्ष से लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक इस मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं।
बांकीपुर की हार के बाद क्यों बढ़ी इस बैठक की अहमियत
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब बिहार की राजनीति बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर केंद्रित है। यह सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। लगभग तीन दशक तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा, लेकिन इस बार पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नतीजे के बाद एनडीए के भीतर चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समीक्षा को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रशांत किशोर ने पहली चुनावी लड़ाई में दर्ज की बड़ी जीत
बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने पहले चुनाव में जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, क्योंकि पार्टी के घोषित प्रत्याशी अभिषेक 'बंटी' ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था।
बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिए हमेशा प्रतिष्ठा की सीट मानी जाती रही है। यह सीट तब खाली हुई थी जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधानसभा से इस्तीफा दे चुके थे। उपचुनाव में कुल 25 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें आठ निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल थे। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। रेखा गुप्ता को 14,273 वोट मिले। इससे पहले 2025 के विधानसभा चुनाव में भी वह नितिन नवीन से 50 हजार से अधिक वोटों के अंतर से चुनाव हार चुकी थीं।
कम मतदान भी बना चर्चा का विषय
इस उपचुनाव में 30 जुलाई को मतदान हुआ था। करीब 3.8 लाख मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में केवल 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा 2025 के विधानसभा चुनाव में हुए 41.45 प्रतिशत मतदान से काफी कम रहा। कम मतदान और बीजेपी की हार को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है। कई विशेषज्ञ इसे मतदाताओं के बदलते रुझान और स्थानीय मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं।
मुलाकात पर बढ़ीं अटकलें, लेकिन आधिकारिक बयान का इंतजार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की इस मुलाकात के बाद दिल्ली से लेकर पटना तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), बीजेपी या जेडीयू की ओर से बैठक में हुई बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक का सीधा संबंध बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों से था। लेकिन चुनावी नतीजों के तुरंत बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई अटकलों को जरूर जन्म दे दिया है।












