ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: 9 मौतों के बाद सामने आया काला चिट्ठा, 61 चालान ने खोली सिस्टम की पोल

यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के बाद बस के पुराने रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में बस चालक और परिचालक पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, यात्रियों ने बस में समस्या को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन समय रहते बस नहीं रोकी गई।
हादसे के बाद बस के यातायात नियमों के पुराने रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, बस नंबर BR 32 PA 4687 के खिलाफ 13 अप्रैल 2023 से 19 अगस्त 2026 के बीच कुल 61 चालान दर्ज हुए। इनमें से 19 चालान अभी लंबित बताए जा रहे हैं, जिनकी कुल राशि करीब 1.75 लाख रुपये है।
19 चालान अब भी लंबित
रिकॉर्ड के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 को दिल्ली के मयूर विहार में बस के खिलाफ दो चालान किए गए थे। इनमें एक में 18,500 रुपये का जुर्माना लंबित है। इसमें स्टेज कैरिज/कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के ऊपर सामान होने का उल्लंघन दर्ज है। दूसरे मामले में 15 हजार रुपये का जुर्माना लंबित बताया गया है। इसमें बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाले चालक को वाहन चलाने की अनुमति देने को परमिट की शर्तों का उल्लंघन बताया गया है।
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बस में इमरजेंसी गेट के ऊपर स्लीपर टियर
गौतमबुद्ध नगर आरटीओ कार्यालय के मोटर वाहन निरीक्षक संजय कुमार गुप्ता के मुताबिक, जांच के दौरान बस की ऊंचाई निर्धारित मानकों से ज्यादा पाई गई। बस में इमरजेंसी गेट मौजूद था, लेकिन उसके ऊपर स्लीपर टियर लगा हुआ था। जांच में बस के अंदर कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स भी रखे मिले। अधिकारियों के मुताबिक, इमरजेंसी गेट के ऊपर स्लीपर टियर होने से आपात स्थिति में यात्रियों को बाहर निकालने में परेशानी हो सकती थी।
अलग-अलग राज्यों से जुड़े बस के दस्तावेज
बस राज कल्पना ट्रैवल्स की बताई जा रही है। इसका संचालन मध्य प्रदेश से होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बस नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस डिपो से चलती थी। बस का पंजीकरण बिहार के मधुबनी जिले में बताया गया है। इसके फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी अलग-अलग राज्यों से जारी होने की जानकारी सामने आई है। फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान और प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी होने की बात कही गई है।
हादसे के बाद उठ रहे कई सवाल
बस के पुराने रिकॉर्ड सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उसके खिलाफ लगातार चालान दर्ज हो रहे थे और इनमें कई चालान का भुगतान भी लंबित था, तो बस का संचालन लगातार कैसे जारी रहा। हालांकि, केवल चालान की संख्या के आधार पर हादसे का कारण तय नहीं किया जा सकता। हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग की जांच में बस की तकनीकी स्थिति, चालक-परिचालक की भूमिका, पुराने यातायात उल्लंघन और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।



















