POCSO केस के बीच पिता को बच्चों की कस्टडी नहीं! मां को UK ले जाने की मिली इजाजत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक मां को अपने दो नाबालिग बच्चों को यूनाइटेड किंगडम ले जाने और वहां स्कूल में दाखिला दिलाने की अनुमति दी। पिता के खिलाफ POCSO कानून के तहत मामला चल रहा है और जांच के बाद आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। अदालत ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान पिता को बच्चों की कस्टडी देना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों को भी रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों की कस्टडी तय करते समय सबसे पहले उनकी सुरक्षा और भलाई देखी जानी चाहिए। अदालत के मुताबिक, जब पिता के खिलाफ POCSO मामले में जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, तब आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने के दौरान उसे बच्चों की कस्टडी देना उचित नहीं है। यह मामला दो बच्चों की कस्टडी को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के उन आदेशों पर रोक जारी रखी, जिनमें पिता को बच्चों का एकमात्र संरक्षक माना गया था।
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मां को बच्चों के साथ UK जाने की अनुमति
अदालत ने फिलहाल मां को दोनों बच्चों को यूनाइटेड किंगडम ले जाने और वहां स्कूल में दाखिला कराने की इजाजत दी है। मां को छह सप्ताह के भीतर बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी हलफनामे के जरिए अदालत के सामने रखने को कहा गया है। साथ ही उन्हें यह भरोसा भी देना होगा कि अदालत जब भी बच्चों को पेश करने का निर्देश देगी, वह उसका पालन करेंगी। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी।
मां की नौकरी को ‘खानाबदोश जीवन’ कहना गलत
मामले में निचली अदालतों ने मां के अलग-अलग शहरों में नौकरी करने को उनके जीवन की अस्थिरता से जोड़कर देखा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस नजरिए से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि वैवाहिक घर से अलग होने के बाद मां ने अपने करियर को आगे बढ़ाने और बच्चों के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करने की कोशिश की। इसलिए नौकरी के कारण अलग-अलग जगह जाना अपने आप में बच्चों के हित के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
बच्चों की इच्छा और सुरक्षा को भी देखा गया
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बच्चों से बातचीत भी की। इसके बाद अदालत ने उनकी अपने पिता के साथ रहने को लेकर अनिच्छा और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखा। गर्मियों की छुट्टियों में पिता और बच्चों के बीच निगरानी में मुलाकात भी कराई गई थी। अदालत ने माना कि कस्टडी के मामले में बच्चों की सुरक्षा, उनकी इच्छा और मानसिक स्थिति जैसे पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
POCSO आरोपों पर हाईकोर्ट की टिप्पणी हटाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई, जिसमें लंबित POCSO कार्यठ ने संबंधित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। साथ ही पिता की कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर फैसला स्वतंत्रवाही के दौरान आरोपों की सत्यता पर विचार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले का अंतिम फैसला अभी होना बाकी है, इसलिए ऐसी टिप्पणियां समय से पहले थीं। पीठ ने संबंधित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। साथ ही पिता की कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर फैसला स्वतंत्र रूप से करने को कहा गया।
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अदालत ने बच्चों के हित को रखा सबसे ऊपर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बच्चों के सर्वोत्तम हित को कस्टडी विवाद का मुख्य आधार माना। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ इस वजह से कि बच्चे दूसरे देश में जाएंगे, यह मान लेना सही नहीं होगा कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर हो जाएंगे। फिलहाल मां को बच्चों के साथ UK जाने की अनुमति मिल गई है, जबकि पिता की कस्टडी का दावा आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने तक स्वीकार नहीं किया गया है। इस मामले पर अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी।




















