Phalguna Sankashti Chaturthi 2026 :4 या 5 फरवरी... संकष्टी चतुर्थी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इसे फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और विशेष कृपा प्राप्त होती है।
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि और समय
चतुर्थी तिथि आरंभ: 5 फरवरी 2026, गुरुवार, रात 12:09 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 फरवरी 2026, शुक्रवार, रात 12:22 बजे
चंद्र उदय का समय: 5 फरवरी 2026, रात 09:10 बजे
इस दिन व्रत रखने और चंद्र दर्शन करने का विशेष महत्व है। चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
जानें शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - 04:56 ए एम से 05:48 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 05:22 ए एम से 06:39 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:50 ए एम से 12:34 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:03 पी एम से 02:47 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 05:43 पी एम से 06:08 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 05:45 पी एम से 07:02 पी एम
अमृत काल - 03:32 पी एम से 05:11 पी एम
निशिता मुहूर्त - 11:46 पी एम से 12:38 ए एम, 06 फरवरी
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा घर में लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें और गणेशजी को फूल, जल, रोली आदि अर्पित करें।
- गणेशजी को मोदक और तिल के लड्डू का भोग लगाएं।
- धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
- शाम के समय व्रत कथा का पाठ करें और चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
- गणेशजी की पूजा और व्रत से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- व्रत करने से जीवन के संकट कम होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- चंद्रमा का दर्शन इस व्रत का मुख्य हिस्सा है; इसके बिना व्रत अधूरा रहता है।











