Parliament Monsoon Session :लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, 9 घंटे की बहस के बाद ध्वनिमत से मिली मंजूरी

लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। बिल पर लंबी चर्चा और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद इसे मंजूरी मिली। बिल पास होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
राहुल गांधी के बयान पर सदन में हुआ हंगामा
बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष ने उनके बयान पर आपत्ति जताई, जबकि विपक्ष ने सरकार को घेरा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
जितेंद्र सिंह बोले- विपक्ष गंभीर चर्चा की जगह राजनीति कर रहा है
बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की प्रतिबद्धता को यह बिल मजबूत करता है, लेकिन विपक्ष इस पर गंभीर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है।
'राहुल गांधी ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया'
जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सदन में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को संसद की गरिमा और नियमों का पालन करना चाहिए।
'देश के युवाओं का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, युवा देश का भविष्य हैं और उनके बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
21 जुलाई की घटना का भी किया जिक्र
जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए थे और इस पूरे घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए।
'गोली नहीं चली, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ'
सदन में आंदोलन के दौरान गोली चलाने के आरोपों पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि संबंधित घटना में कोई गोली नहीं चली थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं होता, बल्कि यह निर्णय केवल संबंधित मजिस्ट्रेट ले सकता है।



















