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गोटमार मेला- दोनों तरफ से पत्थरों के आक्रमण के बाद पांढुर्णा ने जीता झंडा, 1321 खिलाड़ी घायल

पांढुर्णा में पोला पर्व के दूसरे दिन गोटमार मेले के दौरान जाम नदी में पत्थरबाजी जारी रही। झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष आमने-सामने रहे। पत्थर लगने से 1321 लोग घायल हुए, इनमें से 8 को नागपुर रेफर किया गया। अंत में पांढुर्णा ने झंडा जीता।
गोटमार मेला- दोनों तरफ से पत्थरों के आक्रमण के बाद पांढुर्णा ने जीता झंडा, 1321 खिलाड़ी घायल
पांढुर्णा और सावरगांव के बीच गोटमार मेले में हुई पत्थरबाजी।

पांढुर्णा। पोला पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को गोटमार मेले के दौरान जाम नदी में पत्थरबाजी जारी है। बीच नदी  में लगे झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के खिलाड़ी आमने-सामने हैं। पत्थर लगने से 1321 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों के सिर फूट गए। 8 गंभीर घायलों को नागपुर रेफर किया  गया। वहीं, पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके ने भी पत्थरबाजी की।

किसी का पैर टूटा, किसी की  कंधे की हड्डी

इस दौरान सावरगांव निवासी 33 वर्षीय नितिन भादे का पैर टूट गया। 48 वर्षीय प्रह्लाद साहू के कंधे की हड्डी टूट गई। पांढुर्णा निवासी 39 वर्षीय सचिन हाटेकर का पैर टूट गया। सावरगांव निवासी 30 वर्षीय संजय धारपुरे के सिर और पैर में गंभीर चोट आई है।

मेडिकल कॉलेज नागपुर रेफर

  • संजय धारपुरे पिता हरीचंद्र 30 साल सावरगांव 
  • सचिन थाटेकर राधाकृष्ण वार्ड पांढुर्णा 38 साल
  • प्रीतम पिता योगेश राउत खारी वार्ड पांढुर्णा 21 साल
  • नितिन पिता अशोक भादे उम्र 28 वर्ष सावरगांव
  • राजू कामड़े उम्र 24 साल निवासी शास्त्री वार्ड पांढुर्णा
  • सचिन नासरे उम्र 30 साल निवासी जलाराम वार्ड पांढुर्णा
  • कैलाश साहू उम्र 35 साल निवासी नादनवाड़ी
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7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए 

घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। घायलों को जरूरत के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है।

प्रेमी जोड़ो की कहानी से जुड़ा हुआ है गोटमार मेला 

गोटमार मेले का इतिहास बताया जाता है कि बरसों साल पहले पांढुर्णा का युवक और सावरगांव की युवती को भगा ले गया था जैसे ही जाम नदी के बीच पहुंचा तो युवती के परिवार के लोग और गांव के लोगों ने युवक पर पत्थर की बौछार कर दी जैसे ही इसकी जानकारी पांढुर्णा पक्ष के लोगों को लगी तो वह भी युवक को बचाने के लिए पत्थर बरसने लगे लेकिन इसी बीच दोनों तरफ से पत्थर बरसाना शुरू हुई तो दोनों की ही मौत हो गई गांव के लोगों ने शव को मां चंडिका मंदिर में ले जाकर रखा पूजा के बाद अंतिम संस्कार किया गया। इसी घटना के बाद से ही परंपरा शुरू हो गई। पोला पर्व के दूसरे दिन गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। दोनों तरफ से होने वाली पत्थरबाजी में कई लोग घायल होते हैं। 

 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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