पेट्रोल-डीजल की किल्लत से बेहाल पाकिस्तान! ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ की तैयारी; 8 बजे बाजार बंद, 4 दिन खुलेंगे दफ्तर?

पाकिस्तान में एक बार फिर ईंधन और ऊर्जा संकट गहराने की खबर सामने आई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदमों पर विचार कर रही है। इनमें बाजारों को रात 8 बजे तक बंद करना, दफ्तरों के कामकाज के दिन कम करना और पढ़ाई को ऑनलाइन करना जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो पाकिस्तान में शाम होते ही बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में गतिविधियां काफी कम हो सकती हैं। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अंतिम फैसला सरकार की ओर से किया जाना बाकी है।
शाम 8 बजे के बाद बाजार बंद करने का प्रस्ताव
पाकिस्तान सरकार की आपातकालीन योजना में बिजली और ईंधन की खपत कम करने के लिए कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, शॉपिंग मॉल और कमर्शियल मार्केट को शाम 8 बजे तक बंद करने की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल को रात 10 बजे तक बंद करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। मेडिकल स्टोर जैसी जरूरी सेवाओं को इससे बाहर रखा जा सकता है, ताकि आपात स्थिति में लोगों को परेशानी न हो। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत घटाना और बिजली की बचत करना बताया जा रहा है।
अरब सागर में अचानक बदले हालात! भारत-पाक नौसेनाओं के बीच टक्कर, जानिए पूरा मामला
दफ्तर और स्कूलों के लिए भी बड़े बदलाव
ईंधन बचाने की कोशिश सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं रहने वाली है। प्रस्तावित योजना में सरकारी और निजी दफ्तरों के कामकाज के दिनों को भी कम करने की बात कही गई है। इसके तहत दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों को हफ्ते में चार दिन खोलने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छुट्टी रखने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा स्कूलों को बंद रखकर कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई को ऑनलाइन मोड में चलाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। कॉर्पोरेट और आईटी सेक्टर के कर्मचारियों के लिए सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों की यात्रा और वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत कम की जा सकेगी।
पाकिस्तान की 14 से ज्यादा सैन्य चौकियों पर BLA के कब्जे का दावा, हथियार लूटने का भी आरोप
सरकारी अधिकारियों के फ्यूल अलाउंस में कटौती
ईंधन बचाने के लिए सरकारी खर्च में कटौती की योजना भी प्रस्तावित बताई जा रही है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले फ्यूल अलाउंस में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का सुझाव दिया गया है। सरकार का मकसद सरकारी वाहनों और आधिकारिक यात्राओं में होने वाली ईंधन खपत को कम करना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने का अंतिम निर्णय भी सरकार पर निर्भर करेगा।
आखिर पाकिस्तान में क्यों बढ़ा संकट?
पाकिस्तान के सामने इस समय ईंधन से जुड़ी दो बड़ी चुनौतियां बताई जा रही हैं। पहली है पेट्रोल-डीजल का सीमित स्टॉक और दूसरी है विदेशी मुद्रा पर बढ़ता दबाव। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। यह क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
पाकिस्तान में CM के ‘अपहरण’ का दावा, सड़क किनारे छोड़ने का आरोप; पंजाब सरकार ने बताया ड्रामा
सिर्फ 28 दिन का स्टॉक बचने का दावा
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के पास करीब 28 दिनों का पेट्रोल-डीजल स्टॉक उपलब्ध है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होती है और नए आयात में परेशानी आती है, तो यह स्टॉक तेजी से कम हो सकता है। यही वजह है कि सरकार ईंधन की खपत को तुरंत कम करने के विकल्प तलाश रही है।
क्या पूरे पाकिस्तान में पसरेगा सन्नाटा?
अगर सरकार के ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो पाकिस्तान में शाम 8 बजे के बाद बाजारों की रौनक काफी कम हो सकती है। रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल के समय पर भी असर पड़ेगा। वहीं, स्कूल और कॉलेजों के संचालन में बदलाव से आम लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह लागू फैसला नहीं माना जा सकता। सरकार की ओर से प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय और विस्तृत नियम सामने आना बाकी है।



















