मक्का में खतरे की घंटी! हूती ड्रोन को सऊदी ने रास्ते में ही रोका, जारी किया अलर्ट

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज होने के बीच सऊदी अरब ने मक्का के पास एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही इंटरसेप्ट कर लिया गया। इस घटना के बाद पवित्र शहर में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया।
मक्का में पहली बार जारी हुआ अलर्ट
सऊदी सिविल डिफेंस ने मंगलवार को मक्का समेत जेद्दा और ताइफ के कुछ इलाकों में संभावित हमले को लेकर थोड़े समय के लिए चेतावनी जारी की थी। AFP के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में मौजूदा युद्ध शुरू होने के बाद मक्का के लिए यह पहला ऐसा अलर्ट था। बाद में चेतावनी हटा ली गई। सऊदी प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर रहने की अपील की।
सऊदी ने कहा- मक्का के पास ड्रोन मार गिराया
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम करीब 6:50 बजे मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाया। गठबंधन के प्रवक्ता ने मक्का और वहां मौजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को बेहद अहम बताया है। वहीं, हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है।
यमन में फिर तेज हुआ संघर्ष
मक्का के पास ड्रोन घटना ऐसे समय हुई है, जब यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच लड़ाई तेज हो गई है। हालिया संघर्ष में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक यमन में 90 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। 15 सितंबर तक UNHCR ने देश के भीतर नए विस्थापन का आंकड़ा एक लाख से ज्यादा बताया।
2 हजार से ज्यादा लोग जिबूती पहुंचे
लड़ाई से परेशान हजारों यमनी लोग समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंच रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी IOM के अनुसार, 13 सितंबर तक 2 हजार से ज्यादा लोग यमन से भागकर जिबूती पहुंच चुके थे। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, ईंधन की कमी और समुद्री यात्रा के जोखिम के कारण लोगों का पलायन भी मुश्किल हो गया है। एजेंसियों को आने वाले दिनों में और लोगों के जिबूती पहुंचने की आशंका है।
बाब-अल-मंदेब पर भी बढ़ी चिंता
यमन का संघर्ष अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री रास्ता लाल सागर के जरिए वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संघर्ष बढ़ने से इस इलाके में जहाजों की आवाजाही और मानवीय सहायता पहुंचाने में मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने भी सुरक्षा बिगड़ने पर मानवीय और व्यावसायिक जहाजरानी पर असर की चेतावनी दी है।
गृहयुद्ध की वापसी का डर
यमन में 2022 के बाद संघर्ष में काफी कमी आई थी, लेकिन हालिया हिंसा ने एक बार फिर स्थिति बिगाड़ दी है। लगातार बढ़ते हमलों, विस्थापन और रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण की लड़ाई के बीच यमन के दोबारा बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की ओर जाने की चिंता बढ़ रही है।




















