CGPSC Mains की कॉपियों ने खोली मूल्यांकन की पोल,सही जवाब पर कम नंबर, गलत उत्तर पर भी अंक देने का आरोप

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की मुख्य परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। RTI के जरिए प्राप्त कुछ उत्तरपुस्तिकाओं में अभ्यर्थियों द्वारा लिखे गए उत्तर और दिए गए अंकों में कथित असमानता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के परिणाम के बाद 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया है और साक्षात्कार 21 सितंबर 2026 से शुरू होना है।
RTI कॉपियों से उठे बड़े सवाल
RTI से प्राप्त उत्तरपुस्तिकाओं को आधार बनाकर अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में कथित विसंगतियों के उदाहरण सामने रखे हैं। उनका दावा है कि कुछ मामलों में सही उत्तर लिखने वाले और गलत अथवा अधूरे उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थियों को मिले अंकों में अपेक्षित अंतर दिखाई नहीं देता। इन दावों की स्वतंत्र रूप से सभी उत्तरपुस्तिकाओं के स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन सामने रखे गए उदाहरणों ने CGPSC की मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है।
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महाभिनिष्क्रमण के जवाब में नंबरों का अंतर
बौद्ध धर्म से जुड़े महाभिनिष्क्रमण के प्रश्न का उदाहरण देते हुए अभ्यर्थियों का दावा है कि अलग-अलग उत्तरपुस्तिकाओं में समान अथवा मिलते-जुलते बिंदु लिखे जाने के बावजूद अंकों में अंतर दिखाई देता है। दावा है कि गृहत्याग, घोड़े के प्रतीक और ज्ञान प्राप्ति जैसे बिंदुओं से संबंधित उत्तरों में एक जगह 0.5 अंक, जबकि दूसरी जगह 1.5 अंक दिए गए।
घरेलू हिंसा अधिनियम पर भी सवाल
घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 2 से जुड़े प्रश्न को लेकर भी मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जहां उत्तर में “महिला” लिखे जाने पर 0.5 अंक मिले, वहीं “पुरुष” लिखे गए उत्तर को भी समान अंक दिए जाने का उदाहरण RTI कॉपी में दिखाई देता है।
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सही-गलत जवाब को समान अंक?
छत्तीसगढ़ में Home Rule League की स्थापना से जुड़े प्रश्न का उदाहरण भी सामने आया है। दावे के अनुसार एक अभ्यर्थी ने वर्ष 1917 और रायपुर का उल्लेख किया, जिसके लिए 2.5 अंक दिए गए। वहीं दूसरे उत्तर में कथित तौर पर 1923 और स्वराज पार्टी का उल्लेख होने के बावजूद 2.5 अंक दिए गए। इसी अंतर को लेकर अभ्यर्थी मूल्यांकन प्रणाली की कसौटी पर सवाल उठा रहे हैं।
माता राजिम तेलिन के जवाब ने बढ़ाई हलचल
माता राजिम तेलिन से जुड़े प्रश्न में भी अलग-अलग उत्तरपुस्तिकाओं के अंकों का हवाला दिया जा रहा है। अभ्यर्थियों के अनुसार एक उत्तर में सही तथ्यों के आधार पर 3.5 अंक, जबकि दूसरे कथित गलत उत्तर में जनजातीय देवी तथा कोंडागांव/केशकाल का उल्लेख होने के बावजूद 1.5 अंक दिए गए।
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“भोग लगाती थी…” वाले जवाब पर 4.5 अंक का दावा
सबसे ज्यादा चर्चा उस उदाहरण की है, जिसमें एक अभ्यर्थी द्वारा कथित तौर पर बार-बार “भोग लगाती थी”, “भोग लगा रही थी”, “भोग लगाना चाहिए” जैसे वाक्य लिखे जाने के बावजूद 4.5 अंक मिलने का दावा किया जा रहा है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि यह उत्तर वास्तव में प्रश्न की अपेक्षित विषयवस्तु को पूरा नहीं करता था, तो इतने अंक किस आधार पर दिए गए?
अंग्रेजी पेपर की कॉपियों पर भी सवाल
अंग्रेजी के पेपर को लेकर भी मूल्यांकन में कथित असमानता का आरोप है। अभ्यर्थियों के अनुसार एक उत्तरपुस्तिका में काफी हिस्सा खाली होने के बावजूद 7.5 अंक दिए गए, जबकि दूसरे अभ्यर्थी के बिंदुवार और प्रमाणिक उत्तरों को कथित तौर पर 4.5 से 5 अंक मिले। इसी को लेकर अभ्यर्थियों ने पूछा है कि यदि मूल्यांकन दो स्तरों पर होता है, तो अलग-अलग कॉपियों में इतने अंतर की वजह क्या है?
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दो स्तर की जांच, फिर विसंगति क्यों?
अभ्यर्थियों का मुख्य सवाल CGPSC की मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि उत्तरपुस्तिकाओं की जांच में एक्जामिनर और हेड एक्जामिनर जैसे स्तर होने के बावजूद यदि RTI से मिली कॉपियों में इस तरह की कथित विसंगतियां सामने आती हैं, तो इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। हालांकि, इन उदाहरणों के आधार पर पूरी परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया को गलत ठहराने से पहले आयोग का आधिकारिक पक्ष और मूल उत्तरपुस्तिकाओं का विशेषज्ञ परीक्षण जरूरी होगा।
21 सितंबर से इंटरव्यू, उससे पहले उठी मांग
CGPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का परिणाम जारी होने के बाद 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इंटरव्यू 21 सितंबर 2026 से शुरू होना है। इसी बीच अभ्यर्थियों का एक वर्ग मांग कर रहा है कि इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू होने से पहले कथित मूल्यांकन विसंगतियों की जांच कराई जाए।
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अभ्यर्थियों की पांच बड़ी मांगें
अभ्यर्थियों की ओर से मुख्य रूप से ये मांगें उठाई जा रही हैं—
विवादित उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से मूल्यांकन की जांच हो।
लापरवाही पाए जाने पर संबंधित परीक्षकों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
उत्तरपुस्तिकाएं अभ्यर्थियों को पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाएं।
कथित विसंगतियों की जांच पूरी होने तक इंटरव्यू प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए।
CGPSC की ओर से भी आया स्पष्टीकरण
इसी विवाद के बीच CGPSC ने 2025 मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू के लिए 608 अभ्यर्थियों के चयन को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया था। आयोग के अनुसार न्यूनतम अर्हकारी अंक नहीं पाने के कारण निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र हुए और आयोग ने पुनर्मूल्यांकन/पुनर्गणना के प्रावधान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की थी। इसलिए मौजूदा विवाद में RTI से सामने आई उत्तरपुस्तिकाओं के आरोपों और CGPSC के आधिकारिक नियम/स्पष्टीकरण—दोनों पक्षों को सामने रखना महत्वपूर्ण है।
2021-22 विवाद की पृष्ठभूमि भी चर्चा में
CGPSC की मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने के बीच आयोग की पिछली भर्ती से जुड़े विवाद भी फिर चर्चा में हैं। 2021 की परीक्षा से संबंधित कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी रही है। हालिया रिपोर्टों में इस मामले में ED की गिरफ्तारी और CBI जांच/चार्जशीट से संबंधित घटनाक्रम भी सामने आए हैं। हालांकि, पुराने मामले और वर्तमान मूल्यांकन विवाद को एक ही घटना मानना उचित नहीं होगा। दोनों मामलों की जांच और तथ्य अलग-अलग हैं।
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आयोग कार्यालय पहुंचे संवाददाता, नहीं मिला जवाब
इस मामले में CGPSC का पक्ष जानने के लिए संवाददाता आयोग कार्यालय पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी और सुरक्षा कर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया। दूसरे दिन भी आयोग कार्यालय पहुंचने पर गेट पर पुलिस बल की मौजूदगी में संवाददाता को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। संबंधित अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने और सवालों का संदेश भेजने का दावा भी किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।




















