ड्रोन दीदी का कमाल! 15 मिनट में एक एकड़ खेत का छिड़काव, सालाना 2 लाख तक कमाई

जांजगीर-चांपा: जब आधुनिक तकनीक महिला सशक्तिकरण से जुड़ती है, तो बदलाव की तस्वीर और भी प्रभावशाली हो जाती है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोड़ी की रहने वाली हेमलता मनहर ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली हेमलता आज आधुनिक कृषि तकनीक के जरिए न सिर्फ किसानों की मदद कर रही हैं, बल्कि खुद भी आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। केंद्र सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मिले कृषि ड्रोन का संचालन कर हेमलता अब किसानों के खेतों में नैनो यूरिया, डीएपी और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करती हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान अब 'ड्रोन दीदी' के रूप में बन चुकी है।
15 मिनट में एक एकड़ खेत का छिड़काव
कम समय, कम मेहनत और समान छिड़काव—ड्रोन तकनीक का यही फायदा किसानों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है। हेमलता के मुताबिक, ड्रोन की मदद से करीब 10 से 15 मिनट में एक एकड़ फसल में दवा का छिड़काव किया जा सकता है। पहले इसी काम में किसानों को कम से कम 2 से 3 घंटे तक मेहनत करनी पड़ती थी। इसके अलावा मजदूर, पानी और दवा के इस्तेमाल से लागत भी बढ़ जाती थी। ड्रोन से छिड़काव होने पर फसल पर दवा का अपेक्षाकृत समान वितरण होता है और दवा की बर्बादी कम करने में मदद मिलती है।
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पहले हिचकिचाहट, अब एडवांस बुकिंग
शुरुआत में गांव और आसपास के किसानों के बीच ड्रोन से खेती में छिड़काव को लेकर कुछ हिचकिचाहट थी। लेकिन खेतों में ड्रोन के सफल प्रदर्शन और इसके समय की बचत को देखने के बाद किसानों का भरोसा बढ़ता गया। अब स्थिति यह है कि फसल सीजन शुरू होने से पहले ही किसान हेमलता से ड्रोन छिड़काव के लिए एडवांस बुकिंग कराने लगे हैं। इससे साफ है कि आधुनिक कृषि तकनीक अब ग्रामीण इलाकों में किसानों की जरूरत का हिस्सा बनती जा रही है।
घरेलू जिम्मेदारियों से ड्रोन पायलट तक
हेमलता की कहानी सिर्फ खेती में तकनीक के इस्तेमाल की नहीं, बल्कि महिला आत्मनिर्भरता की भी कहानी है। आर्थिक आजादी ने उनके आत्मविश्वास और परिवार की स्थिति में भी बदलाव किया है। ड्रोन के जरिए कृषि सेवा उपलब्ध कराकर हेमलता प्रतिवर्ष करीब 1 से 2 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। इस आमदनी से वे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने बच्चों की शिक्षा में भी योगदान दे रही हैं।
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गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
हेमलता मनहर अब अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनका काम यह दिखाता है कि आधुनिक तकनीक केवल बड़े किसानों या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी तकनीक का इस्तेमाल कर रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह बना सकती हैं।
खेती में बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल
कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल समय और श्रम की बचत के साथ-साथ आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किसानों को पारंपरिक तरीकों के विकल्प उपलब्ध करा रहा है। जांजगीर-चांपा की हेमलता मनहर इसी बदलाव की स्थानीय तस्वीर हैं। एक ड्रोन ने न सिर्फ खेतों में छिड़काव का तरीका बदला, बल्कि एक महिला को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी दी है।




















