अपराध रोकने का नया फॉर्मूला:120 दिनों तक लगातार जनसंवाद

इंदौर। पुलिस और जनता के बीच दूरी कम करने के लिए शुरू किए गए जनसंवाद अभियान का असर अब शहर के कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। इंदौर पुलिस कमिश्नर की पहल पर थाना स्तर पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर आम लोगों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याएं सुनने के निर्देश दिए गए थे। इसका उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच ऐसा भरोसा कायम करना था, जिसमें लोग बिना झिझक अपनी समस्या और क्षेत्र में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकें।
थाने तक पहुंचने से पहले पुलिस पहुंची जनता के बीच
थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल का कहना था कि आमतौर पर किसी घटना या शिकायत के बाद पुलिस और जनता का संपर्क थाने तक सीमित रह जाता है। जनसंवाद अभियान ने इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश की। पुलिसकर्मी खुद लोगों के बीच पहुंचे और उनसे क्षेत्र की समस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर जानकारी ली।
पॉश इलाके की सुरक्षा पर विशेष फोकस
विजय नगर थाना क्षेत्र शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में शामिल है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में मॉल, होटल, मल्टीप्लेक्स और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। शहर के बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी यह इलाका प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।
यह भी देखें: UPI, IMPS, NEFT और RTGS में क्या है अंतर? जानिए लिमिट और ट्रांजैक्शन चार्ज
छोटी सूचना भी पुलिस के लिए बनी बड़ी मदद
एसीपी पराग सेनी ने बताया कि लगातार संवाद का असर यह हुआ कि क्षेत्र में होने वाली छोटी-बड़ी घटनाओं की जानकारी पुलिस तक पहले की तुलना में जल्दी पहुंचने लगी। पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से संदिग्ध गतिविधियों को लेकर भी लोग अधिक सजग हुए।
यह भी देखें: ट्रक में 354 पशुओं को ले जा रहा था, 7 आरोपी गिरफ्तार; जांच में जुटी पुलिस
साइबर फ्रॉड को भी बनाया जनसंवाद का हिस्सा
पिछले कुछ समय में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए विजय नगर थाना पुलिस ने जनसंवाद कार्यक्रम में साइबर अपराध से बचाव को भी प्रमुखता से शामिल किया।
यह भी देखें: मप्र हाईकोर्ट ने कहा-‘रिटायरमेंट के 7 साल बाद पेंशन से नहीं की जा सकती वसूली’, राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज
शिकायतों के समाधान में संवाद की भूमिका
पुलिस के अनुसार जनसंवाद का उद्देश्य लोगों को थाने बुलाने के बजाय पुलिस को लोगों के बीच ले जाना है। जब पुलिस अधिकारी खुद क्षेत्र में पहुंचते हैं तो लोगों को अपनी समस्या बताने में आसानी होती है।
यह भी देखें: बुरहानपुर में रात को मदीना होटल पर नगर निगम का छापा, 12 किलो अमानक पॉलीथिन पन्नी जब्त; 10 हजार का जुर्माना
पुलिस-पब्लिक के बीच भरोसा ही सबसे बड़ा हथियार
एसीपी पराग सेनी ने बताया कि अपराध नियंत्रण केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। किसी भी क्षेत्र को सुरक्षित बनाने में वहां रहने वाले लोगों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोग अपने क्षेत्र की गतिविधियों को सबसे करीब से देखते हैं। ऐसे में यदि उन्हें पुलिस पर भरोसा हो तो वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय रहते दे सकते हैं।





















