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UPI, IMPS, NEFT और RTGS में क्या है अंतर? जानिए लिमिट और ट्रांजैक्शन चार्ज

UPI से RTGS तक, हर बैंक ट्रांजैक्शन की अपनी लिमिट और चार्ज होते हैं। UPI रोजमर्रा के पेमेंट का सबसे लोकप्रिय तरीका बन चुका है। आम तौर पर UPI की ट्रांजैक्शन लिमिट 1 लाख रुपए तक होती है।
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UPI, IMPS, NEFT और RTGS में क्या है अंतर? जानिए लिमिट और ट्रांजैक्शन चार्ज
UPI से तुरंत भेजें बड़ी रकम

आज बैंकिंग का ज्यादातर काम मोबाइल से ही हो जाता है। किसी को पैसे भेजने हों, बिल भरना हो या बड़ी रकम दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करनी हो, इसके लिए बैंक की ब्रांच जाने की जरूरत नहीं पड़ती। UPI, IMPS, NEFT और RTGS जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने पैसे भेजना काफी आसान बना दिया है। लेकिन हर पेमेंट सिस्टम की अपनी लिमिट और नियम होते हैं। खासकर जब बड़ी रकम ट्रांसफर करनी हो, तब यह जानना जरूरी है कि कौन-सा माध्यम आपके लिए सही रहेगा और उस पर कितना चार्ज लग सकता है।

UPI से कितने रुपए भेज सकते हैं

UPI रोजमर्रा के पेमेंट का सबसे लोकप्रिय तरीका बन चुका है। आम तौर पर UPI की ट्रांजैक्शन लिमिट 1 लाख रुपए तक होती है। हालांकि कुछ खास कैटेगरी में ज्यादा रकम ट्रांसफर करने की अनुमति होती है। हॉस्पिटल में पेमेंट, एजुकेशन फीस और इंश्योरेंस जैसे कुछ मामलों में UPI की लिमिट 5 लाख रुपए तक हो सकती है। यह लिमिट बैंक और संबंधित पेमेंट कैटेगरी के नियमों पर भी निर्भर कर सकती है। UPI ट्रांजैक्शन आमतौर पर तुरंत हो जाता है और सामान्य बैंक अकाउंट से UPI पेमेंट करने पर ग्राहक से अलग ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाता।

IMPS से तुरंत भेजें बड़ी रकम

अगर आपको किसी बैंक खाते में तुरंत पैसे भेजने हैं तो IMPS उपयोगी विकल्प है। इसके जरिए पैसे 24 घंटे और सातों दिन ट्रांसफर किए जा सकते हैं। IMPS में आम तौर पर 5 लाख रुपए तक की रकम ट्रांसफर की जा सकती है। हालांकि बैंक अपनी तरफ से अलग लिमिट तय कर सकता है। IMPS पर लगने वाला चार्ज भी बैंक और ट्रांजैक्शन की रकम के हिसाब से अलग हो सकता है। कई बैंक इसमें मामूली फीस लेते हैं जबकि कुछ अकाउंट या डिजिटल चैनल पर शुल्क अलग हो सकता है।

NEFT में कितने रुपए भेज सकते हैं?

NEFT यानी National Electronic Funds Transfer बड़ी रकम बैंक खाते में भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख माध्यम है। NEFT के लिए RBI की तरफ से कोई अधिकतम ट्रांजैक्शन लिमिट तय नहीं की गई है। हालांकि आपका बैंक अपनी तरफ से दैनिक या प्रति-ट्रांजैक्शन लिमिट निर्धारित कर सकता है। NEFT सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है। ऑनलाइन NEFT ट्रांसफर पर आम तौर पर ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाता। ब्रांच के जरिए ट्रांजैक्शन करने पर बैंक के नियमों के अनुसार चार्ज लग सकता है। अगर आपको बहुत बड़ी रकम ट्रांसफर करनी है और तुरंत पैसे पहुंचने की जरूरत नहीं है, तो NEFT एक विकल्प हो सकता है।

RTGS बड़ी रकम भेजने के लिए

RTGS यानी Real Time Gross Settlement का इस्तेमाल मुख्य रूप से बड़े मूल्य के ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है। RTGS में न्यूनतम 2 लाख रुपए ट्रांसफर किए जा सकते हैं।इसकी कोई अधिकतम सीमा RBI की तरफ से तय नहीं है, लेकिन बैंक अपनी आंतरिक लिमिट लागू कर सकते हैं। RTGS भी 24x7 उपलब्ध है और ट्रांजैक्शन सामान्य तौर पर रियल टाइम में प्रोसेस होता है। ऑनलाइन RTGS ट्रांसफर पर ग्राहक से सामान्य तौर पर शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि ब्रांच से किए गए ट्रांजैक्शन पर बैंक के नियमों के मुताबिक शुल्क लग सकता है।

ATM से कैश निकालने की लिमिट

ATM से एक दिन में कितना कैश निकाला जा सकता है, यह आपके बैंक और डेबिट कार्ड के प्रकार पर निर्भर करता है। अलग-अलग कार्ड में दैनिक कैश निकासी की लिमिट अलग हो सकती है। अपने बैंक के ATM के अलावा दूसरे बैंक के ATM का इस्तेमाल करने पर एक महीने में निर्धारित मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या पूरी होने के बाद शुल्क लग सकता है। इसलिए बार-बार कैश निकालने से पहले अपने कार्ड की मुफ्त ATM ट्रांजैक्शन लिमिट जरूर देख लें।

डेबिट कार्ड से पेमेंट की लिमिट

दुकान पर कार्ड स्वाइप करने या ऑनलाइन शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी दैनिक लिमिट बैंक और कार्ड के प्रकार के आधार पर अलग होती है। कई बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए कार्ड की ATM और ऑनलाइन पेमेंट लिमिट खुद सेट करने की सुविधा भी देते हैं।

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क्रेडिट कार्ड से कितना खर्च कर सकते हैं?

क्रेडिट कार्ड में पेमेंट की सीमा आपके कार्ड की स्वीकृत क्रेडिट लिमिट पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए अगर आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपए है तो सामान्य परिस्थितियों में आप उपलब्ध क्रेडिट लिमिट के भीतर ही खर्च कर सकते हैं। समय पर पूरा क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने पर खरीदारी पर सामान्य तौर पर अलग से ब्याज नहीं लगता। हालांकि लेट पेमेंट, कैश निकालने और कुछ दूसरी सेवाओं पर अलग शुल्क या ब्याज लागू हो सकता है।

ECS और NACH से अपने आप कटती है रकम

ECS और NACH जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम और बिजली-पानी जैसे नियमित भुगतान के लिए किया जाता है। इसमें ग्राहक पहले बैंक को एक मैंडेट देता है और तय तारीख पर रकम खाते से ऑटोमैटिक डेबिट हो जाती है। इसमें कितनी रकम कटेगी, यह आपके दिए गए मैंडेट और संबंधित सेवा के नियमों पर निर्भर करता है। किसी तरह का चार्ज है या नहीं, यह बैंक और सर्विस प्रोवाइडर के नियमों के अनुसार अलग हो सकता है।

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कौन-सा तरीका कब इस्तेमाल करें?

अगर छोटी रकम तुरंत भेजनी है तो UPI सबसे आसान विकल्प है। कुछ लाख रुपए तक की तुरंत बैंक ट्रांसफर जरूरत के लिए IMPS काम आ सकता है। बड़ी रकम के लिए NEFT और RTGS का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि ऊपर बताई गई लिमिट हर बैंक और हर ग्राहक के लिए बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। बैंक अपने ग्राहकों, अकाउंट के प्रकार और डिजिटल चैनल के हिसाब से अलग लिमिट तय कर सकते हैं। इसलिए बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले अपने बैंक की मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग या आधिकारिक वेबसाइट पर लागू ट्रांजैक्शन लिमिट और शुल्क जरूर चेक करें।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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