PU Special :इंदौर को मिलेगी रिंग रोड जैसी कनेक्टिविटी, 9200 करोड़ के ईस्टर्न बायपास का प्रस्ताव केंद्र को भेजा

इंदौर के तेजी से बढ़ते महानगरीय विस्तार और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए 9,200 करोड़ रुपए की लागत से 83 किमी लंबे ईस्टर्न बायपास का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। छह लेन का यह बायपास देवास, खातेगांव और खंडवा रोड सहित आसपास के क्षेत्रों को इंदौर से जोड़ेगा।
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इंदौर को मिलेगी रिंग रोड जैसी कनेक्टिविटी, 9200 करोड़ के ईस्टर्न बायपास का प्रस्ताव केंद्र को भेजा
इंदौर को मिलेगी रिंग रोड जैसी कनेक्टिविटी

अशोक गौतम,  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर सिंहस्थ से पहले ईस्टर्न बायपास को आगे बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा की है। बायपास बनने से शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होने के साथ देवास, खातेगांव और खंडवा रोड की ओर आवागमन आसान होगा। भोपाल-इंदौर ग्रीन एक्सप्रेस-वे को केंद्र की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है और करीब 6000 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य भोपाल-इंदौर सफर को करीब एक घंटे में पूरा करना है। वहीं करीब 17 हजार करोड़ रुपए की अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना की डीपीआर नए सिरे से तैयार की जाएगी। 

9,200 करोड़ में बनेगा 83 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास

इंदौर के ईस्टर्न बायपास की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई है। 83 किमी लंबे इस छह लेन बायपास की लागत करीब 9,200 करोड़ रुपए होगी। यह देवास, खातेगांव, खंडवा रोड और आसपास के क्षेत्रों को इंदौर से जोड़ेगा। इसके बनने से शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होने के साथ आसपास औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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वेस्टर्न बायपास पर 2 हजार करोड़ से काम जारी

इंदौर के पश्चिमी हिस्से में करीब 64 किमी लंबे वेस्टर्न बायपास पर लगभग 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरा होने पर ईस्टर्न बायपास के साथ शहर के चारों ओर वैकल्पिक मार्ग का नेटवर्क तैयार होगा। इससे इंदौर को रिंग रोड जैसी कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।

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भोपाल-इंदौर ग्रीन एक्सप्रेस-वे को भी रफ्तार

भोपाल-इंदौर ग्रीन एक्सप्रेस-वे को केंद्र की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है। एनएचएआई की ट्रैफिक स्टडी में करीब 30 हजार पैसेंजर कार यूनिट का अनुमान है। 170 से 200 किमी लंबे प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे की दूरी मौजूदा मार्ग से करीब 35 से 40 किमी कम होगी। परियोजना प्रारंभिक तौर पर चार लेन की होगी, जबकि डिजाइन आठ लेन के अनुरूप तैयार किया जाएगा। भोपाल, सीहोर और देवास से एक्सेस-कंट्रोल कनेक्टिविटी प्रस्तावित है और करीब 6000 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना का लक्ष्य भोपाल-इंदौर सफर को करीब एक घंटे में पूरा करना है।

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आठ साल बाद अटल प्रोग्रेस-वे की तैयारी

चंबल क्षेत्र के औद्योगिक विकास से जुड़ी करीब 17 हजार करोड़ रुपए की अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना की डीपीआर नए सिरे से तैयार की जाएगी। भूमि अधिग्रहण कम करने के लिए मौजूदा राजमार्गों और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों को परियोजना में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। वर्ष 2022 में किसानों के विरोध के बाद परियोजना पर रोक लगाई गई थी। अब एनएचएआई नए सिरे से एलाइनमेंट तैयार करेगा। प्रस्ताव के अनुसार करीब 1800 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी, जिसमें 63 गांवों की निजी और 13 गांवों की करीब 408 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। मप्र एनएचएआई  के क्षेत्रीय अधिकारी एनएल येवतकर ने बताया, इंदौर के ईस्टर्न बायपास की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई है। इससे इंदौर को रिंग रोड मिल जाएगा, क्योंकि वेस्टर्न बायपास पहले से बन रहा है। अटल प्रोग्रेस-वे का नए सिरे से डीपीआर तैयार करने के लिए केंद्र से मंजूरी दी गई है। अब पुराने मार्गों को इसका हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। वहीं भोपाल-इंदौर ग्रीन एक्सप्रेस-वे को सिंहस्थ से पहले बनाने पर भी केंद्र और राज्य सरकार मंथन कर रही है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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