‘आसमानी हाथी’ से ‘फुर्तीले योद्धा’ तक, नेपाल में फंसी जिंदगियां बचाने उतरे भारत के 3 महाबली, ताकत जानकर रह जाएंगे हैरान

नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। तेज बहाव में गांव, सड़कें और कई पुल बह गए हैं। बाढ़ की तस्वीरें इतनी भयावह हैं कि उन्हें देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मुश्किल की इस घड़ी में भारत एक बार फिर नेपाल की मदद के लिए आगे आया है। राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए भारतीय वायुसेना को तैयार किया गया है। राहत सामग्री, दवाइयां और जरूरी सामान नेपाल भेजे जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर बचाव टीमों और प्रभावित लोगों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। भारत की ओर से राहत अभियान में C-17 ग्लोबमास्टर III, C-130J सुपर हरक्यूलिस और C-295 जैसे सैन्य परिवहन विमानों की क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये विमान कठिन और पहाड़ी इलाकों में तेजी से राहत पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं।
C-130J ने राहत सामग्री के साथ भरी उड़ान
भारतीय वायुसेना का C-130J सुपर हरक्यूलिस राहत अभियान में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विमान में करीब 10 टन जरूरी राहत सामग्री और दवाइयां लेकर नेपाल भेजी गई हैं। C-130J को खास तौर पर ऐसे इलाकों के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां बड़े विमानों के लिए उतरना मुश्किल होता है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश में इसकी क्षमता राहत अभियान के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इस विमान की अधिकतम पेलोड क्षमता करीब 19 टन है। इसकी रेंज लगभग 3,800 किलोमीटर और अधिकतम गति करीब 670 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है।
छोटे और मुश्किल रनवे पर भी उतर सकता है C-130J
C-130J की सबसे बड़ी खासियत इसकी शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग क्षमता है। यानी यह कम लंबाई वाली हवाई पट्टी से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में यह क्षमता बेहद काम आती है। कई बार प्राकृतिक आपदा के बाद मुख्य हवाई अड्डे या सड़क संपर्क प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे समय में कम सुविधाओं वाले रनवे तक राहत पहुंचाना जरूरी हो जाता है। C-130J में आधुनिक नेविगेशन और नाइट-विजन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मुश्किल परिस्थितियों में भी ऑपरेशन करना आसान होता है।
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भारी राहत सामग्री के लिए C-17 ग्लोबमास्टर
अगर किसी इलाके में भारी मात्रा में राहत सामग्री, बड़े उपकरण, मशीनें या दूसरी जरूरी चीजें पहुंचानी हों, तो C-17 ग्लोबमास्टर III बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। यह भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े रणनीतिक परिवहन विमानों में शामिल है। इसकी पेलोड क्षमता करीब 77.5 टन है। C-17 की अधिकतम गति करीब 830 किलोमीटर प्रति घंटा है। पूरी तरह लोड होने पर इसकी उड़ान क्षमता करीब 4,482 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि कम वजन के साथ यह 10,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अपेक्षाकृत छोटे और कम सुविधाओं वाले रनवे पर भी ऑपरेशन कर सकता है। यही कारण है कि बड़े पैमाने पर राहत सामग्री पहुंचाने के मिशन में यह विमान बेहद उपयोगी होता है।
C-295 भी राहत मिशन में अहम
भारतीय वायुसेना का C-295 अपेक्षाकृत हल्का और आधुनिक परिवहन विमान है। इसे मध्यम स्तर की राहत सामग्री, मेडिकल सप्लाई और जरूरत पड़ने पर कर्मियों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। C-295 की पेलोड क्षमता करीब 9 टन बताई जाती है और इसमें लगभग 71 सैनिकों को ले जाने की क्षमता है। इसकी अधिकतम गति करीब 480 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस विमान में रियर रैंप दिया गया है। इसकी मदद से सामान को तेजी से लोड और अनलोड किया जा सकता है। आपदा के समय जब हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, तब यह सुविधा काफी उपयोगी साबित होती है।
हेलिकॉप्टर भी रहेंगे तैयार
नेपाल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सिर्फ बड़े परिवहन विमानों से राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं होगा। कई ऐसे इलाके हो सकते हैं जहां सड़कें और पुल बाढ़ में बह गए हों या जहां विमान उतारने के लिए रनवे ही उपलब्ध न हो। ऐसे स्थानों पर हेलिकॉप्टर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हेलिकॉप्टर प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीम, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने के साथ-साथ फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद कर सकते हैं।
नेपाल के लिए भारत बना मददगार पड़ोसी
नेपाल इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। ऐसे वक्त में भारत की राहत सहायता प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। भूकंप, बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं पहाड़ी इलाकों में बड़ी तबाही ला सकती हैं। नेपाल में आई इस आपदा के बीच भारत की ओर से राहत सहायता बढ़ाना दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग को भी दिखाता है।



















