नेपाल में फ्लैश फ्लड का कहर... कहीं मिल रही लाशें, कहीं अपनों का इंतजार; मौतों का आंकड़ा 1365 पहुंचा

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। मलबे और तबाही के बीच प्रभावित इलाकों से हर दिन नए शव बरामद हो रहे हैं। बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,365 हो गई है। वहीं 5,326 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। ऐसे में हजारों परिवार अभी भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
चितवन और नवलपरासी में सबसे ज्यादा शव मिले
नेपाल पुलिस के मुताबिक, चितवन में सबसे ज्यादा 363 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद पूर्वी नवलपरासी से 226 और पश्चिमी नवलपरासी से 222 शव मिले हैं। नुवाकोट में 197, रसुवा में 174, गोरखा में 75, धादिंग में 70 और तनहूं में 38 शव बरामद किए गए हैं। शवों की पहचान का काम भी जारी है। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब तक 102 शव उनके परिवारों को सौंपे जा चुके हैं।
1,147 अज्ञात शव सुरक्षित रखे गए
आपदा के बाद बरामद हुए कई शवों की अभी पहचान नहीं हो सकी है। सुरक्षा बलों ने 1,147 अज्ञात शवों को प्रक्रिया के तहत सुरक्षित ढंग से रखा है। इन शवों के DNA सैंपल भी लिए गए हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि आगे इन सैंपल की मदद से शवों की पहचान की जा सकेगी और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।
मलबा खिसकने से आई थी अचानक बाढ़
यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास शुरू हुई थी। बर्फ और चट्टानों का बड़ा मलबा अचानक खिसक गया था। इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आ गई। भोटेकोशी नदी के उफान ने तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में भारी तबाही मचाई। गांवों, बाजारों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद बाढ़ का पानी आगे बढ़ता गया और बड़ी संख्या में घरों और गाड़ियों के साथ जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
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मलबे में अब भी जारी है तलाशी
बाढ़ की तबाही के कई दिन बाद भी बचाव दल मलबे के बीच लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। टीमों की कोशिश है कि लापता लोगों का पता लगाया जा सके और ज्यादा से ज्यादा शवों को बरामद किया जा सके। मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने के बीच नेपाल प्रशासन के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, मलबे में लापता लोगों को तलाशना और दूसरी, बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना। हजारों परिवार अब भी अपनों की तलाश में हैं और उन्हें किसी खबर का इंतजार है।




















