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NCB की बड़ी कार्रवाई, ड्रग्स तस्करी नेटवर्क की 20.10 करोड़ रुपये की 25 संपत्तियां फ्रीज

NCB ने अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल ड्रग्स डायवर्जन मामले में 20.10 करोड़ रुपये की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश की पुष्टि कराई है। जांच में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं की जब्ती हुई है।
NCB की बड़ी कार्रवाई, ड्रग्स तस्करी नेटवर्क की 20.10 करोड़ रुपये की 25 संपत्तियां फ्रीज
NCB की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल ड्रग्स डायवर्जन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने करीब 20.10 करोड़ रुपये मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश की पुष्टि हासिल कर ली है। इन संपत्तियों में औद्योगिक भूखंड, व्यावसायिक इकाइयां, दुकानें, ऑफिस और आवासीय फ्लैट शामिल हैं। NCB के मुताबिक, ये संपत्तियां प्रतिबंधित और साइकोट्रॉपिक दवाओं के कथित अवैध कारोबार से अर्जित रकम से खरीदी गई थीं। एजेंसी ने 30 अक्टूबर 2026 को NDPS एक्ट की धारा 68F(2) के तहत 2 अक्टूबर को जारी अपने फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि कराई। जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से मिलने वाली रकम को जांच के दायरे में आई कंपनियों के बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया। आरोपियों के नाम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के लिए आय के वैध स्रोत भी कथित तौर पर नहीं बताए जा सके।

मोहाली समेत कई इलाकों में हैं फ्रीज की गई संपत्तियां

NCB की कार्रवाई के दायरे में आई 25 संपत्तियां मोहाली के अलग-अलग व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन समेत कई स्थानों की संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों में औद्योगिक प्लॉट के अलावा दुकानें, ऑफिस, व्यावसायिक इकाइयां और आवासीय फ्लैट भी हैं। एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य कथित ड्रग्स कारोबार से बनाई गई संपत्तियों और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसना है।

5 हजार ट्रामाडोल टैबलेट की जब्ती से शुरू हुई थी जांच

यह मामला 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5 हजार ट्रामाडोल टैबलेट की जब्ती के बाद सामने आया था। टैबलेट की पैकेजिंग पर निर्माता कंपनी M/s J R Pharmaceuticals, हरिद्वार और मार्केटिंग कंपनी M/s Tiwari Medical Agencies, देहरादून का नाम दर्ज था। जांच के दौरान NCB को पता चला कि मार्केटिंग कंपनी का वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। इसके बाद एजेंसी ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दवाओं की सप्लाई चेन की पड़ताल शुरू की। जांच में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय कंपनियों के नेटवर्क का पता चला। NCB के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर गैर-मौजूद संस्थाओं के नाम पर दवाओं की सप्लाई कर अवैध कारोबार चलाया जा रहा था।

34 लाख से ज्यादा साइकोट्रॉपिक टैबलेट समेत भारी मात्रा में दवाएं जब्त

NCB के मुताबिक इस मामले की जांच के दौरान अब तक बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और साइकोट्रॉपिक दवाएं जब्त की गई हैं। जब्ती का ब्योरा इस प्रकार है:

  • करीब 34 लाख साइकोट्रॉपिक टैबलेट
  • कोडीन आधारित कफ सिरप की 10.57 लाख बोतलें
  • 50 हजार ट्रामाडोल एम्प्यूल
  • 5 हजार मिडाजोलम वायल
  • करीब 2,200 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक पाउडर

जब्त सामग्री में दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल और तैयार दवाएं, दोनों शामिल हैं। एजेंसी ने मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

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सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क

NCB की जांच में सामने आया कि दवाओं की अवैध सप्लाई और वितरण का यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। एजेंसी के अनुसार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में इस नेटवर्क की गतिविधियां सामने आई हैं।जांच में हिमाचल प्रदेश के काला अंब स्थित M/s Digital Vision और M/s Vellinton Healthcare से बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं और कच्चा माल बरामद किया गया। एजेंसी इन कंपनियों की भूमिका और दवाओं की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

अंबाला के तीन आरोपी अब भी फरार

NCB के मुताबिक अंबाला कैंट निवासी कोनिक गोयल, मैनिक गोयल और उनके पिता परशोत्तम लाल गोयल इस मामले में अब भी फरार हैं। एजेंसी का कहना है कि बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद तीनों जांच में शामिल नहीं हुए हैं। NCB के अनुसार तीनों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी हैं। एजेंसी उनकी तलाश और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

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NCB ने स्पष्ट किया है कि उसकी कार्रवाई केवल नशीली दवाओं की जब्ती तक सीमित नहीं है। एजेंसी पूरे तस्करी नेटवर्क के साथ-साथ उसे आर्थिक मदद पहुंचाने वाले तंत्र पर भी कार्रवाई कर रही है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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