पांढुर्णा में 15 घंटे कुएं में फंसा रहा तेंदुआ, वन अमला खटिया-सीढ़ी लगाकर चला गया; सुबह हुआ गायब

पांढुर्णा। टीम ने कुएं में खटिया और रस्सी की सीढ़ी डाल दी, ताकि तेंदुआ खुद बाहर निकल सके। रविवार सुबह टीम मौके पर पहुंची तो तेंदुआ कुएं से गायब था। कुएं के पास खेत में मिले पंजों के निशान से उसके जंगल की ओर जाने की पुष्टि हुई।
मोटर चालू करने पहुंचे किसान ने देखा तेंदुआ
बोथिया निवासी किसान भाऊराव खवसे शनिवार को खेत में बने कुएं की मोटर चालू करने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें कुएं के कोने में तेंदुआ बैठा दिखाई दिया। उन्होंने आसपास के किसानों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही देर में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को बाहर निकालने का प्रयास किया। शाम तक चले रेस्क्यू के बाद भी तेंदुआ कुएं से बाहर नहीं निकला। रात होने पर टीम ने कुएं में खटिया और रस्सी की सीढ़ी डाल दी, ताकि तेंदुआ इनके सहारे बाहर निकल सके।
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सुबह पहुंचे तो कुएं में नहीं मिला तेंदुआ
डिप्टी रेंजर गुलाब धुर्वे ने बताया कि शनिवार रात तेंदुए को बाहर निकालने के लिए कुएं में खटिया और रस्सी की सीढ़ी छोड़ी गई थी। रविवार सुबह वन विभाग की टीम दोबारा खेत पर पहुंची तो तेंदुआ कुएं में नहीं मिला। कुएं के पास खेत में उसके पंजों के निशान मिले हैं। वन विभाग ने इनका पंचनामा बनाया है। अधिकारियों के मुताबिक तेंदुआ सीढ़ी और खटिया के सहारे बाहर निकलकर जंगल की ओर चला गया।
जंगल से लगे खेतों में वन्यजीवों की आवाजाही
बोथिया गांव मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है। आसपास घना जंगल होने के कारण यहां तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में पांच से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी है। हर 15 से 20 दिन में तेंदुए मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। जंगल से लगे खेतों में काम करने वाले किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।




















