जबलपुर: डॉ. अर्जुन शुक्ला की बड़ी उपलब्धि, नर्मदा की 5 जलीय प्रजातियों को मिला कॉपीराइट
हर्षित चौरसिया, जबलपुर। शासकीय होम साइंस कॉलेज के जूलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक और पर्यावरणविद् डॉ. अर्जुन शुक्ला वर्ष 2019 से जलीय जीवों पर शोध कर रहे हैं। बरगी बांध, ग्वारीघाट और भेड़ाघाट में किए गए सर्वेक्षण में कुल 78 प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें पांच प्रजातियों के मौलिक वैज्ञानिक छायाचित्रों और दस्तावेजीकरण को भारत सरकार से कॉपीराइट संरक्षण मिला है। शोध में इन जीवों की मौजूदगी से नर्मदा के जलीय और नदीतटीय पर्यावरण को समझने में मदद मिलेगी।
बरगी से भेड़ाघाट तक 78 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण
नर्मदा नदी की लहरों में मौजूद जैव विविधता को वैज्ञानिक दस्तावेजों में सहेजने के लिए शासकीय होम साइंस कॉलेज, जबलपुर के जूलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं पर्यावरणविद् डॉ. अर्जुन शुक्ला ने पहल की है। बरगी बांध, ग्वारीघाट और भेड़ाघाट में किए गए क्षेत्रीय सर्वेक्षण में उन्होंने मोलस्का की 31 और ओडोनेटा की 47 प्रजातियों सहित कुल 78 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया। इन प्रजातियों के वैज्ञानिक छायाचित्र भी तैयार किए गए हैं।
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पांच प्रजातियों के छायाचित्रों को मिला कॉपीराइट
इस शोध की खास उपलब्धि यह है कि पांच प्रजातियों से संबंधित मौलिक वैज्ञानिक छायाचित्रों और दस्तावेजीकरण को भारत सरकार से कॉपीराइट संरक्षण मिला है। इनमें मोलस्का समूह के तीन जीव शंख, सीप और घोंघा शामिल हैं। वहीं, ओडोनेटा समूह के व्याध पतंग यानी ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई की प्रजातियों के मौलिक छायाचित्रों को भी संरक्षण मिला है।
घोंघों से लेकर ड्रैगनफ्लाई तक का अध्ययन
कॉपीराइट संरक्षण प्राप्त प्रजातियों में थियारा स्कैब्रा, लाइम्निया ल्यूटियोला और इंडोप्लेनॉर्बिस एक्ज़स्टस शामिल हैं। इसके अलावा सेरियाग्रियन कोरोमंडेलियानम और ब्रैकिथेमिस कॉन्टामिनाटा के वैज्ञानिक छायाचित्रों को भी संरक्षण मिला है। यह उपलब्धि केवल तस्वीरों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि नर्मदा क्षेत्र की जैव विविधता के दृश्य वैज्ञानिक रिकॉर्ड को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
नदी के पर्यावरण की स्थिति समझने में मददगार हैं ये जीव
डॉ. अर्जुन शुक्ला के अध्ययन में शामिल मोलस्का समूह के मीठे पानी के घोंघे जलीय खाद्य शृंखला और पोषक तत्वों के चक्रण में भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, ओडोनेटा समूह में ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई जैसे कीट शामिल हैं, जिनका जीवन चक्र पानी और नदी के आसपास के प्राकृतिक आवासों से जुड़ा होता है। इन जीवों की प्रजातिगत विविधता और मौजूदगी से जलीय एवं नदीतटीय पर्यावरण को समझने में मदद मिलती है।
प्रजातियों की मौजूदगी से नर्मदा में पर्याप्त ऑक्सीजन का संकेत
अध्ययन में दर्ज जलीय जीवों की मौजूदगी नदी के पर्यावरण को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इनकी प्रजातिगत विविधता और वितरण में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड भविष्य में पर्यावरणीय स्थितियों के आकलन में उपयोगी हो सकता है। प्रजातियों की मौजूदगी से नर्मदा में पर्याप्त ऑक्सीजन स्तर होने का संकेत भी सामने आया है।
2019 से जलीय जीवों पर लगातार कर रहे शोध
डॉ. अर्जुन शुक्ला वर्ष 2019 से लगातार जलीय जीवों पर शोध कर रहे हैं। बरगी बांध, ग्वारीघाट और भेड़ाघाट में किए गए तीन क्षेत्रों के सर्वेक्षण को भविष्य के शोध का आधार माना जा रहा है। पांच प्रजातियों को मिले कॉपीराइट संरक्षण की तारीखें भी अलग-अलग हैं। थियारा स्कैब्रा को 16 अप्रैल 2026, लाइम्निया ल्यूटियोला को 1 जुलाई 2026, सेरियाग्रियन कोरोमंडेलियानम को 22 जुलाई 2026, ब्रैकिथेमिस कॉन्टामिनाटा को 6 अगस्त 2026 और इंडोप्लेनॉर्बिस को 14 अक्टूबर 2026 को कॉपीराइट संरक्षण मिला।


























